क्राइम

मिनर्वा हॉस्पिटल पर फिर मौत का साया: मासूम की जान गई, परिजनों ने लगाए ‘हत्या’ के गंभीर आरोप, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

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रीवा। शहर के मिनर्वा हॉस्पिटल पर एक बार फिर गंभीर लापरवाही और अमानवीयता के आरोप लगे हैं। बीते दिन पहले एक 3 माह के मासूम बच्चे की कथित तौर पर ग़लत इलाज और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मौत हो गई थी। आक्रोशित परिजनों ने न सिर्फ़ ज़िम्मेदार डॉक्टरों पर हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है, बल्कि अस्पताल प्रशासन पर लाश को जल्दबाज़ी में हटाने और अनपढ़ परिजनों से ज़बरदस्ती कागज़ात पर दस्तख़त कराने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

खोरकोटी निवासी राजेंद्र साकेत अपने 3 माह के बच्चे को दिल के छेद के इलाज के लिए मिनर्वा हॉस्पिटल लेकर आए थे। परिजनों के अनुसार, अस्पताल ने खुद उन्हें फ़ोन करके बुलाया था कि दिल्ली से डॉक्टर आ रहे हैं और आयुष्मान कार्ड से मुफ़्त में बेहतर इलाज होगा। पिता ने बताया कि डॉक्टरों ने बिना ज़्यादा जाँच किए तत्काल ऑपरेशन करने को कहा, यह कहते हुए कि नहीं करने पर बच्चे की जान चली जाएगी।

बच्चे का ऑपरेशन हुआ, लेकिन परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद बच्चे को होश नहीं आया। परिजनों ने दावा किया कि नर्सों के बीच बातचीत से पता चला कि बच्चे का खून जम गया था और डॉक्टर नर्सों को डांट रहे थे। परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि बच्चे की मौत प्रॉपर इलाज न मिलने और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है।

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अमानवीयता की हदें पार: ‘

बच्चे की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन का व्यवहार सवालों के घेरे में है।
जबरन ‘डिस्चार्ज’: परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने खुद से एम्बुलेंस बुलाई और गार्ड तथा कर्मचारियों की मदद से उन्हें ज़बरदस्ती हॉस्पिटल से भगा दिया।
कागज़ात पर दस्तख़त: पीड़ित पिता ने बताया कि वे कम पढ़े-लिखे हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसका फ़ायदा उठाते हुए उनसे इस बात के कागज़ात पर दस्तख़त करवा लिए कि बच्चा एक्सपायर हो गया है।
: परिजनों का यह भी कहना है कि इलाज से संबंधित कई ज़रूरी कागज़ात अस्पताल वालों ने अपने पास रख लिए।

सिस्टम की चुप्पी पर बड़ा सवाल

यह कोई पहली बार नहीं है जब मिनर्वा हॉस्पिटल पर ऐसे गंभीर आरोप लगे हों। बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है

स्वास्थ्य मंत्री के गृह ज़िले में ऐसे अस्पताल ‘मौत का सौदागर’ कैसे बन रहे हैं?

क्या प्रशासन की आँखों पर नोटों की पट्टी बंधी हुई है कि उन्हें मासूमों की चीख़ें सुनाई नहीं दे रहीं?

इतने गंभीर आरोपों के बाद भी कार्रवाई न होना, क्या किसी ऊपरी संरक्षण की ओर इशारा करता है क्या मिनर्वा अस्पताल से जुड़े लोग बीजेपी की सदस्यता लेने बाले है।

परिजनों की मांग: ‘हत्या का केस दर्ज हो’

पीड़ित परिवार ने अब मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जाँच हो और ज़िम्मेदार डॉक्टरों व अस्पताल प्रबंधन के ख़िलाफ़ ‘हत्या का मामला’ दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा, “हमारे साथ जो हुआ, वह अब किसी और के साथ न हो।”
प्रशासन को इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए तुरंत जाँच शुरू करनी चाहिए, ताकि मृत बच्चे को न्याय मिल सके और स्वास्थ्य सेवा के नाम पर चल रहे इस ‘मौत के सौदे’ को रोका जा सके।

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