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रीवा मिनर्वा की दोहरी तस्वीर: नौसेना प्रमुख ने सराहा, दो दिन पहले मासूम की मौत पर लगे ‘लापरवाही’ के आरोप

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रीवा का अस्पताल विवादों के घेरे में; परिजनों का आरोप- इलाज में लापरवाही से गई जान, प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

रीवा। रीवा के मिनर्वा द मेडिसिटी हॉस्पिटल में एक अजीबोगरीब विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ़, मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने अस्पताल का दौरा कर वहाँ की सेवाओं और अनुशासन की सराहना की, वहीं दूसरी तरफ़, इसी अस्पताल पर दो दिन पहले एक मासूम बच्चे की कथित लापरवाही से हुई मौत के मामले में ‘ लापरवाही व हत्या’ तक के आरोप लगे हैं।

प्रशंसा का दौर: एडमिरल त्रिपाठी ने किया दौरा

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भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी का अस्पताल आगमन हुआ, जहाँ उन्होंने कार्डियोलॉजी, आईसीयू, आपातकालीन और मार्त एवं शिशु इकाइयों का निरीक्षण किया। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. शिशिर मिश्रा और डॉ. धर्मेश कुमार पटेल ने उनका स्वागत किया। एडमिरल त्रिपाठी ने इस दौरान अस्पताल को “सेवा और अनुशासन का सुंदर उदाहरण” बताते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उसकी उत्कृष्टता को सराहा।

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दो दिन पहले का दर्दनाक सच: मासूम की मौत तालियों की गूंज में दबा

हालांकि, इस प्रशंसा से ठीक पहले, मिनर्वा हॉस्पिटल एक 3 माह के बच्चे की संदिग्ध मौत को लेकर विवादों में घिरा हुआ था। मृत बच्चे के परिजनों ने खुले तौर पर आरोप लगाया है कि बच्चे की जान डॉक्टरों की लापरवाही और ग़लत इलाज के कारण गई। बच्चे को दिल के छेद के इलाज के लिए लाया गया था और ऑपरेशन के बाद उसे होश नहीं आया, जिस पर नर्सों के बीच ‘खून जमने’ की बात होने का दावा किया गया है।

बच्चे के पिता और अन्य परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि:

डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उनसे ज़बरदस्ती मौत होने के कागज़ात पर दस्तख़त करवा लिए, जबकि वे कम पढ़े-लिखे हैं।
अस्पताल ने खुद ही एम्बुलेंस बुलाकर लाश को जल्दबाज़ी में घर भेजने और परिजनों को ज़बरन अस्पताल से हटाने का प्रयास किया।
परिजनों ने ज़िम्मेदार डॉक्टरों पर सीधे हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है, सबसे बड़ा गंभीर दावा यह भी है कि कुछ स्थानीय पत्रकारों पर 500 लेकर खबर दबाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

 

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व्यवस्था पर उठे सवाल

एक ही संस्थान, दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रहा है। एक ओर देश के शीर्ष अधिकारी उसकी सराहना कर रहे हैं, दूसरी ओर एक आम परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।
क्या उच्चस्तरीय सम्मान और प्रशंसा, गंभीर लापरवाही के आरोपों पर पर्दा डाल सकती है?
क्या स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन केवल ‘वीआईपी इवेंट्स’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और गरीब मरीज़ों की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ कर रहा है?
बार-बार विवादों में आने के बावजूद इस निजी अस्पताल के ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है?
आवश्यक है कि प्रशासन इस विरोधाभास को गंभीरता से ले। मासूम की मौत के मामले में तुरंत और निष्पक्ष जाँच शुरू की जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और रीवा के नागरिकों का स्वास्थ्य सेवाओं में विश्वास बना रहे।

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