Mp news: रीवा अतिक्रमण विरोधी अभियान: एक विधायक की दहाड़, सत्ता की दबंगई और जनता का संघर्ष!
Mp news: आज फिर रीवा शहर में डिप्टी सीएम के मोहल्ले अमहिया की सड़कों पर एक ऐसी लड़ाई लड़ी गई, जिसे इतिहास कभी नहीं भूलेगा। एक तरफ थी सरकारी सत्ता की दबंगई, जो ‘अतिक्रमण’ के नाम पर जनता के घरों और आजीविका को रौंदने के लिए तैयार खड़ी थी। दूसरी तरफ थी जनता का अदम्य संघर्ष, जो अपने हक और वजूद को बचाने के लिए सड़कों पर उतर आई थी। इस संघर्ष को एक नया आयाम दिया, सेमरिया विधायक अभय मिश्रा की दहाड़ ने!
जब नगर निगम का दस्ता जेसीबी लेकर अमहिया पहुँचा, तो उसे लगा कि वह आसानी से अपने अभियान को अंजाम दे देगा। लेकिन, उसे अंदाजा नहीं था कि उसे एक ऐसी दीवार से टकराना पड़ेगा, जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा। जो हैं विधायक अभय मिश्रा, जनता की आँखों में आँसू और अपने घरों को टूटते हुए देखने का दर्द नहीं सह सके। वह जनता के साथ खड़े हुए और सरकारी तंत्र की इस ज्यादती के खिलाफ आवाज़ उठाई।
उनकी दहाड़ मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के मोहल्ले की की हर गली में गूँजी। उन्होंने प्रशासन को चुनौती दी और कहा कि वह जनता के साथ नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने सरकारी तंत्र की इस दबंगई पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या विकास का मतलब जनता को बेघर करना है? उनकी आवाज़ ने जनता में नया जोश और जज्बा पैदा किया।
रीवा महापौर की चुप्पी
इस संघर्ष में एक और अहम पहलू था, रीवा महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ की चुप्पी। विधायक अभय मिश्रा ने उनकी इस चुप्पी पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर महापौर का सड़क पर न आना बेहद दुखद है। उन्होंने महापौर की इस चुप्पी को जनता के साथ विश्वासघात बताया। उन्होंने पूछा कि क्या महापौर जनता के हितों की रक्षा करने के लिए चुने गए हैं, या सत्ता की चाटुकारिता करने के लिए।
अमहिया के निवासियों ने इस संघर्ष में अदम्य साहस और दृढ़ता का परिचय दिया। उन्होंने प्रशासन की हर चुनौती का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने नारेबाजी की, प्रदर्शन किया और अपनी ज़मीन को बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश की। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन पीढ़ियों से इस ज़मीन पर व्यापार कर रहे हैं और प्रशासन अचानक उन्हें हटाने की कार्रवाई नहीं कर सकता। उन्होंने सरकारी तंत्र की इस ज्यादती के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की।
