रीवा संभाग

रीवा में साइकिल से दफ्तर पहुंचेंगे अधिकारी, कमिश्नर ने खुद की शुरुआत

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रीवा संभाग में एक बार फिर प्रशासनिक गलियारों में साइकिल की रफ्तार देखने को मिल रही है। पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य के संदेश को लेकर शुरू किया गया “सुमंगल साइकिल अभियान” अब दोबारा चर्चा में है। खास बात यह है कि इस अभियान को खुद कमिश्नर ने फिर से जमीन पर उतारकर इसे ताजा कर दिया है।

 कमिश्नर ने खुद संभाली कमान

रीवा संभाग के कमिश्नर B.S. Jamod ने एक बार फिर इस पहल की कमान अपने हाथ में ली है। उन्होंने खुद साइकिल से कार्यालय पहुंचकर यह साफ संदेश दिया कि यह अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे लगातार अमल में लाया जाएगा।

क्यों फिर से चर्चा में आया अभियान

हालांकि “सुमंगल साइकिल अभियान” पहले भी चलाया जा चुका है, लेकिन समय के साथ इसकी गति थोड़ी धीमी पड़ गई थी।

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अब कमिश्नर द्वारा इसे दोबारा सक्रिय करने के बाद यह फिर से चर्चा में आ गया है। यानी अब यह सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि एक निरंतर अभियान बनने की ओर बढ़ रहा है।

 पर्यावरण के लिए बड़ा संदेश

बढ़ते प्रदूषण और बदलते मौसम के बीच यह पहल बेहद अहम मानी जा रही है। साइकिल का उपयोग करने से ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में कमी आएगी। रीवा प्रशासन का यह कदम सीधे तौर पर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाला है।

 फिटनेस को भी मिल रहा बढ़ावा

साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। कमिश्नर और अन्य अधिकारियों का यह कदम यह दिखाता है कि व्यस्त दिनचर्या के बीच भी फिटनेस को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक स्तर पर एक हेल्दी कल्चर विकसित होने की संभावना है।

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 हर मंगलवार बनेगा ‘साइकिल डे’

इस अभियान के तहत अब हर मंगलवार को अधिकारी और कर्मचारी साइकिल से ही दफ्तर पहुंच रहे हैं।

यह तय किया गया है कि इसे नियमित रूप से जारी रखा जाएगा, ताकि यह एक आदत का रूप ले सके और सिर्फ औपचारिकता बनकर न रह जाए।

बढ़ रही है भागीदारी

कमिश्नर की पहल के बाद अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इसमें शामिल होने लगे हैं। धीरे-धीरे यह अभियान पूरे प्रशासनिक ढांचे में फैलता नजर आ रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नेतृत्व जब खुद उदाहरण पेश करता है, तो टीम अपने आप प्रेरित हो जाती है।

जनता पर भी पड़ेगा असर

प्रशासन की इस पहल का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। जब लोग अधिकारियों को साइकिल से दफ्तर जाते देखेंगे, तो वे भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। यह एक ऐसा कदम है, जो धीरे-धीरे समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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पुरानी पहल, नया जोश

यह अभियान भले ही पहले शुरू हुआ हो, लेकिन अब इसमें नया जोश और नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। कमिश्नर द्वारा इसे फिर से सक्रिय करना इस बात का संकेत है कि प्रशासन अब इसे एक गंभीर और दीर्घकालिक पहल के रूप में देख रहा है।

रीवा संभाग में “सुमंगल साइकिल अभियान” की फिर से शुरुआत एक सकारात्मक संकेत है। यह न सिर्फ पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच एक नई सोच को भी जन्म देता है। अब देखना होगा कि यह अभियान कितनी दूर तक जाता है और क्या यह पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन पाता है।

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