Sariya cement: रीवा में महंगाई का बड़ा झटका: घर बनाना हुआ मुश्किल, निर्माण सामग्री के दामों में भारी उछाल

0
20260411_000014
Share With Others

Sariya cement: विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले में अपना सपनों का घर बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए नया वित्त वर्ष बड़ी मुसीबत लेकर आया है। 1 अप्रैल से निर्माण सामग्री की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम जनता का बजट पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। सीमेंट और लोहे से लेकर गिट्टी, बालू और यहाँ तक कि मजदूरी की दरों में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सीमेंट की बोरियों पर बढ़ी कीमतें:Major Blow of Inflation in Rewa:

बाजार में अल्ट्राटेक, प्रिज्म और बिरला सीमेंट जैसे बड़े ब्रांड्स ने प्रति बैग कीमत में लगभग 20 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। पहले जो सीमेंट लगभग 310 रुपये प्रति बोरी मिल रहा था, अब वह बढ़कर 330 से 340 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि पैकेजिंग बैग की कमी और कच्चे माल की सप्लाई में बाधा इसके मुख्य कारण हैं।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

लोहा और गिट्टी-बालू भी हुए महंगे

मकान निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यानी सरिया की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं। जो सरिया पहले 58 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, वह अब 64 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह, गिट्टी के 10 चक्का ट्रक की कीमत 18,000 रुपये से बढ़कर 22,000 रुपये हो गई है। बालू की कीमतों में भी उछाल आया है और यह 32,000 रुपये प्रति ट्रक तक पहुंच गई है।

मजदूरी ने भी बढ़ाई चिंता

महंगाई का असर केवल सामानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मजदूरी पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। अकुशल मजदूरों की दैनिक मजदूरी जो पहले 400 रुपये थी, वह अब बढ़कर 500 से 600 रुपये प्रतिदिन हो गई है। वहीं, कुशल मिस्त्री अब 700 से 900 रुपये तक की मजदूरी मांग रहे हैं। मजदूरों का तर्क है कि दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम बढ़ने के कारण उन्हें अपनी दरें बढ़ानी पड़ी हैं।

उत्पादन क्षेत्र होने के बावजूद स्थानीय मार

हैरानी की बात यह है कि विंध्य क्षेत्र के रीवा, सतना, सीधी और मैहर जिलों में कुल मिलाकर सात बड़े सीमेंट प्लांट संचालित हैं। इनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता लगभग 25.5 मिलियन टन है। इसके बावजूद स्थानीय बाजारों में कीमतें बढ़ना स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। व्यापारियों का आरोप है कि परिवहन लागत में इजाफा और बाजार में कृत्रिम किल्लत पैदा करने से कीमतें आसमान छू रही हैं।
कुल मिलाकर, सीमित आय वाले परिवारों के लिए अब पक्का मकान बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। बढ़ती लागत के कारण कई लोगों ने अपने निर्माण कार्य को फिलहाल रोकने का फैसला किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed