देशभर में 1 मई को एलपीजी उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा, जब कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा किया गया। राजधानी दिल्ली में 19 किलो वाला कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर करीब ₹993 की बढ़ोतरी के साथ ₹3071.50 के पार पहुंच गया।
हालांकि राहत की बात यह रही कि 2 मई को कंपनियों ने कीमतों में कोई नई बढ़ोतरी नहीं की। लेकिन पहले ही लगातार तीन महीनों की वृद्धि ने बाजार और व्यापारियों की लागत पर बड़ा असर डाला है।
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लगातार तीसरे महीने बढ़े दाम
एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में यह लगातार तीसरे महीने इजाफा है।
1 मार्च: ₹114.50 की बढ़ोतरी
1 अप्रैल: ₹195.50 की बढ़ोतरी
1 मई: ₹993 की भारी बढ़ोतरी
तीनों महीनों को मिलाकर कुल बढ़ोतरी ₹1303 के करीब पहुंच चुकी है, जो कि एक असाधारण उछाल माना जा रहा है।
47% तक बढ़े दाम: व्यापारियों पर असर
फरवरी में जहां कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग ₹1740 थी, वहीं अब यह बढ़कर ₹3071 तक पहुंच गई है। यानी लगभग 47.80% की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस तेज बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और छोटे व्यापारियों पर पड़ा है। कई कारोबारियों का कहना है कि गैस की लागत बढ़ने से खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ानी पड़ सकती हैं।
घरेलू एलपीजी सिलेंडर: आपके शहर में क्या है रेट?
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत बनी हुई है क्योंकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। देश के प्रमुख शहरों में 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट इस प्रकार हैं:
- दिल्ली – ₹913
- कोलकाता – ₹939
- मुंबई – ₹912.50
- चेन्नई – ₹928.50
- गुरुग्राम – ₹921.50
- नोएडा – ₹910.50
- बेंगलुरु – ₹915.50
- भुवनेश्वर – ₹939
- चंडीगढ़ – ₹922.50
- हैदराबाद – ₹965
- जयपुर – ₹916.50
- लखनऊ – ₹950.50
- पटना – ₹1002.50
- भोपाल 940
गौर करने वाली बात यह है कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
LPG बुकिंग नियमों में बड़ा बदलाव
1 मई से एलपीजी सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव कर दिया गया है, जो सीधे उपभोक्ताओं को प्रभावित करेगा।
अब इतनी देर में कर पाएंगे बुकिंग
शहरों में: पहले 21 दिन का अंतराल था, अब 25 दिन कर दिया गया है
ग्रामीण क्षेत्रों में: अब कम से कम 45 दिन का इंतजार करना होगा
इस बदलाव का उद्देश्य एलपीजी की सप्लाई को संतुलित करना और दुरुपयोग को रोकना बताया जा रहा है।
बिना OTP नहीं मिलेगा सिलेंडर
अब एलपीजी डिलीवरी सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाया गया है।
सिलेंडर लेने के लिए OTP या DAC (Delivery Authentication Code) अनिवार्य कर दिया गया है
बिना OTP के अब गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं होगी
जिन उपभोक्ताओं के मोबाइल पर OTP नहीं आ रहा है, उनके लिए e-KYC कराना जरूरी हो गया है।
यह कदम फर्जी बुकिंग और गलत डिलीवरी को रोकने के लिए उठाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
एलपीजी की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी जिम्मेदार मानी जा रही हैं।
भारत अपनी जरूरत का दो-तिहाई से ज्यादा एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता है। मौजूदा वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालातों की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है।
सरकार ने कंपनियों को दिया निर्देश
स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार चाहती है कि देश में उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की मूल्य वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि घरेलू सिलेंडर की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम जनता तक जरूर पहुंचेगा।
होटल और रेस्टोरेंट महंगे हो सकते हैं
फूड डिलीवरी की कीमत बढ़ सकती है
छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले महीनों में घरेलू सिलेंडर की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक तरफ कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3000 के पार पहुंच गया है, वहीं दूसरी ओर बुकिंग नियमों में बदलाव और OTP सिस्टम ने उपभोक्ताओं के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और कंपनियां आने वाले समय में कीमतों को कैसे नियंत्रित करती हैं और क्या उपभोक्ताओं को राहत मिल पाती है या नहीं।
राहुल गांधी ने कहा राजनीति
राहुल गांधी ने LPG कीमतों में बढ़ोतरी को सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक मुद्दा बताया है। उन्होंने इसे “चुनाव के बाद का झटका” बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं और चेतावनी दी है कि आने वाले समय में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
संक्षेप में राहुल गांधी का कहना है:
- सरकार ने चुनाव के दौरान कीमतें नियंत्रित रखीं
- चुनाव खत्म होते ही महंगाई का बोझ जनता पर डाल दिया
- यह आम लोगों और छोटे व्यापारियों के खिलाफ है

