Rewa Airport news: रीवा को हवाई हब बनाने के लिए एयरपोर्ट विस्तार की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है, लेकिन इसके साथ ही विवादों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। चोरहटा क्षेत्र में एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए चिन्हित की गई जमीनों को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अधिग्रहण की आहट मिलते ही भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं और आने वाले समय में मोटा मुआवजा ऐंठने के लिए योजनाबद्ध तरीके से जमीनों की रजिस्ट्री कराई जा रही है।
रजिस्ट्री जारी पर बंटवारे पर रोक
रीवा के चोरहटा क्षेत्र में एक अजीब तरह का विरोधाभास देखने को मिल रहा है। अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता बी.के. माला ने बताया कि जिन जमीनों का अधिग्रहण होना है, वहां जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण बिना किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। लेकिन जब कोई स्थानीय किसान या मूल भू-स्वामी अपने परिवार के बीच जमीन का बंटवारा कराने तहसील पहुंचता है, तो पटवारी और संबंधित अधिकारी यह कहकर मना कर देते हैं कि जमीन अधिग्रहण के लिए चिन्हित है।
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धारा 11 के प्रकाशन में देरी का फायदा
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजस्व संहिता की धारा 11 के प्रकाशन के बाद ही जमीनों की खरीद-फरोख्त पर आधिकारिक रोक लगती है। शासन ने अब तक इस धारा का गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है। इसी कानूनी ढिलाई का फायदा उठाकर कई लोग भविष्य में मिलने वाले भारी मुआवजे के लालच में इन जमीनों को खरीद रहे हैं। यदि समय रहते रजिस्ट्रियों पर रोक नहीं लगाई गई, तो मुआवजे के रूप में शासन को करोड़ों रुपये की चपत लग सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़े घोटाले के रूप में देखा जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि एक तरफ लाभ दिलाने के उद्देश्य से बाहरी लोगों की रजिस्ट्रियां की जा रही हैं, तो दूसरी तरफ किसानों को उनके पैतृक हक से वंचित रखने के लिए बंटवारे रोके जा रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की गई है कि इस विसंगति को तत्काल दूर किया जाए। या तो धारा 11 का प्रकाशन कर नई रजिस्ट्रियों पर रोक लगे, या फिर किसानों को उनके परिवार में जमीन बांटने की अनुमति दी जाए।
