Rewa news: झूठा श्रेय लेने की कोशिश कर रहे कांग्रेस विधायक- जनपद अध्यक्ष का आरोप

Share With Others

Rewa news: सेमरिया विधानसभा में इन दिनों जिस तेजी से विकास कार्य धरातल पर दिख रहे हैं, वह महज संयोग नहीं, बल्कि पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी की लगातार मेहनत, प्रभाव और जनसेवा के जज्बे का सीधा नतीजा है। भले ही वे आज विधायक नहीं हैं, लेकिन वे क्षेत्र की समस्याओं और जनता की जरूरतों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। चाहे वह थांवरिया गांव में स्वीकृत नया विद्युत सबस्टेशन हो या बसामन मामा गौ अभ्यारण्य, पुरवा में 43 लाख की लागत से बनने वाला रपटा सह स्टॉप डैम हो या फिर जर्जर पंचायत भवनों का पुनर्निर्माण, बोड़ा मनखरी से फरहद तक 125 करोड़ और अजगरहा से बहुरीबांध तक 46 करोड़ की लागत से स्वीकृत सड़क निर्माण और चौड़ीकरण परियोजनाओं के साथ ही विभिन्न टोले-मजरों को मुख्यधारा से जोड़ने वाली 45 नई सड़कों की स्वीकृति, जिससे सेमरिया और आसपास के क्षेत्रों में न सिर्फ आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

See also  MP SI 2026: एमपी एसआई  मेंस परीक्षा की तारीखों की घोषणा ईएसबी के फैसले से हड़कंप, मेंस परीक्षा के लिए मिले महज 15 दिन; छात्रों में भारी आक्रोश

इसके साथ ही पुराने कार्यों को भी गति मिली है, जिसमें सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जैसी महत्वपूर्ण अधोसंरचना विकास भी शामिल है, जो क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इन सभी विकास योजनाओं के पीछे अगर किसी का सबसे बड़ा योगदान है तो वह केपी त्रिपाठी हैं। इन प्रयासों से न केवल बिजली आपूर्ति में सुधार होगा बल्कि क्षेत्र की सिंचाई, परिवहन और पर्यावरण की स्थिति भी मजबूत होगी।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

गौशाला, गौ सेवा, जल संरक्षण योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीण अधोसंरचना के विस्तार जैसे हर क्षेत्र में पूर्व विधायक की सक्रियता दर्शाती है कि वह पूरी निष्ठा से जनता की सेवा में समर्पित हैं। वहीं दूसरी ओर मौजूदा कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की भूमिका सवालों के घेरे में है। जनता भलीभांति जानती है कि अभय मिश्रा न तो कोई विकास कार्य शुरू करते हैं और न ही उन्हें पूरा करवाने में उनकी कोई भूमिका होती है।

See also  Rewa news: रीवा कलेक्टर का एक्शन लापरवाही बरतने पर तीन एएनएम निलंबित : पाँच का कटा वेतन

हद तो तब हो जाती है जब वह उन्हीं कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश करते हैं जो भाजपा शासन काल में शुरू हुए थे और खासकर केपी त्रिपाठी के प्रयासों और पहल पर। अभय मिश्रा का राजनीतिक आचरण सिर्फ दूसरों पर आरोप लगाने और भाजपा के खिलाफ बयानबाजी तक ही सीमित है। जबकि केपी त्रिपाठी बिना किसी पद पर रहते हुए भी क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देकर विकास को गति दे रहे हैं।

Leave a Comment