Indian Army ; सरहद पर तैनात फौजी की जमीन पर कब्जा, न्याय के लिए भटकने को मजबूर

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Indian Army ;रीवा। एक तरफ जहां देश की सीमाओं पर जवान चौबीसों घंटे मुस्तैद रहकर वतन की रक्षा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ गृह जिले में उनकी जमीन और परिवार की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला के दुबहा गांव से सामने आया है, जहां भारतीय सेना में पिछले 15 वर्षों से सेवा दे रहे जवान दयानंद सेन वर्तमान में श्रीनगर में तैनात अपनी ही पट्टे की जमीन बचाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

Indian Army ;रास्ते के नाम पर धोखेबाज़ी और मुकदमों का जाल

पीड़ित जवान दयानंद सेन के अनुसार, उनके पास कुल 29 डिसमिल पट्टे की जमीन है, जिसमें से उन्होंने केवल 25 डिसमिल में बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया है। वर्ष 2021 में पड़ोसियों ने रास्ते के लिए 3 फीट जमीन मांगी थी और बदले में पीछे जमीन देने का समझौता किया था। आरोप है कि बाद में पड़ोसी जमीन देने से मुकर गए और उल्टा जवान के खिलाफ राजस्व न्यायालय में धारा 250 का मुकदमा दर्ज करा दिया।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

Indian Army ; गैर-मौजूदगी का फायदा और राजस्व अमले पर मिलीभगत का आरोप

जवान का आरोप है कि उनकी श्रीनगर में ड्यूटी के दौरान राजस्व अमले की मिलीभगत से उनकी अनुपस्थिति में गलत तरीके से सीमांकन कराया गया। इस दौरान घर पर मौजूद उनकी वृद्ध मां, पत्नी और छोटे बच्चों को नोटिस, मुकदमों और कानूनी कार्रवाई की धमकियां देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

Indian Army ;कलेक्टर के निर्देशों को भी किया गया दरकिनार

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिवार ने जब जिला प्रशासन से शिकायत की, तो कलेक्टर ने तहसीलदार व राजस्व निरीक्षक (RI) को मौके पर जाकर निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, पीड़ित जवान का कहना है कि प्रशासन के निर्देशों के बावजूद मौके पर केवल हलका पटवारी प्रतिभा भारती त्रिपाठी पहुंची थीं, जिन्होंने नाप में बाउंड्रीवाल 25 डिसमिल में ही पाई। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

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