Rewa news: रीवा में चल रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। सिरमौर चौराहे से लेकर अमैया और अस्पताल चौराहे तक सड़क के दोनों ओर प्रशासन द्वारा हटाए जा रहे अतिक्रमण के दौरान सिमरिया विधायक अभय मिश्रा के विरोधाभासी बयानों ने शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
पहले लगाए गंभीर आरोप
शुरुआत में जब विधायक अभय मिश्रा प्रभावित व्यापारियों के बीच पहुंचे, तो उन्होंने अपनी ही पार्टी के रीवा महापौर, अजय मिश्रा बाबा की अनुपस्थिति पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि महापौर इस संकट की घड़ी में जनता के साथ नहीं खड़े हो सकते, तो उन्हें वोट मांगने का भी कोई अधिकार नहीं है। विधायक ने आरोप लगाया था कि महापौर ने अधिकारियों पर दबाव बनाया और बिना एमआईसी की अनुमति के कार्रवाई होने दी।
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कुछ ही घंटों में बदला रुख
हैरानी की बात यह रही कि इन तीखे बयानों के कुछ ही घंटों बाद विधायक अभय मिश्रा के सुर पूरी तरह बदल गए। दोबारा व्यापारियों के बीच पहुंचे विधायक ने महापौर का बचाव करना शुरू कर दिया। अब वे नियमों का हवाला देते हुए कहने लगे कि महापौर को इस पूरी कार्रवाई की जानकारी ही नहीं थी और एमआईसी के संज्ञान के बिना ही अधिकारियों ने यह कदम उठाया है।
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पार्टी के अंदर चर्चा तेज
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अपने ही महापौर के खिलाफ दिए गए बयान को लेकर कांग्रेस हाईकमान ने मामले को गंभीरता से लिया, जिसके कारण विधायक को अपनी बातों से पीछे हटना पड़ा। वीडियो में विधायक यह कहते भी सुने गए कि महापौर को दोषी मानना उनकी गलती थी और वे इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। उन्होंने व्यापारियों से कहा कि उन्हें प्रशासन से रहम की भीख मांगने के बजाय अपना अधिकार मांगना चाहिए।
इस दोतरफा बयानबाजी को लेकर अब आम जनता और राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में अंदरूनी खींचतान एक बार फिर आ गई है। कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया की अभय मिश्रा लगता है कि अपने परिवार से रीवा में महापौरी का चुनाव भी लड़बायेंगे हालांकि अभय मिश्रा अपने बयान बाजी से पलट गए हैं उन्होंने बोल दिया कि बाबा को यह जानकारी नहीं थी ।
