MP news:छतरपुर. महाराजा छत्रसाल बुन्देलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर में 10 अक्टूबर को विश्व विद्यालय के नेवी हॉल में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मध्य प्रदेश के अंतर्गत कुलगुरु प्रो राकेश कुशवाह के संरक्षण में एवं कुलसचिव यशवंत पटेल के मार्गदर्शन में कचरा पृथक्करण के महत्व एवं उसकी सही प्रक्रिया के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में भूगर्भशास्त्र अध्ययन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पी. के. जैन ने पीपीटी के माध्यम से “कचरा पृथक्करण क्यों एवं कैसे किया जाता है” विषय पर विद्यार्थियों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। प्रो. जैन ने अपने व्याख्यान में बताया कि बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि तथा उपभोग की बदलती आदतों के कारण कचरे की मात्रा में निरंतर वृद्धि हो रही है। कचरे का उचित पृथक्करण एवं निस्तारण न होने से मृदा, जल और वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ती है। उन्होंने बताया कि यदि घरों, शैक्षणिक संस्थानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग एकत्रित किया जाए, तो पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ उपयोगी संसाधनों का पुनर्चक्रण भी किया जा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को गीले कचरे, सूखे कचरे तथा घरेलू हानिकारक कचरे को अलग-अलग रखने की आवश्यकता समझाई। गीले कचरे, जैसे भोजन के अवशेष, फल एवं सब्जियों के छिलकों से कम्पोस्ट खाद तैयार की जा सकती है, जबकि कागज, प्लास्टिक, धातु एवं कांच जैसे सूखे कचरे का उचित पुनर्चक्रण किया जा सकता है। बैटरी, बल्ब, ई-कचरे तथा अन्य हानिकारक अपशिष्टों को सामान्य कचरे से अलग रखकर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार निस्तारित करना चाहिए। प्रो. जैन ने कहा कि कचरा पृथक्करण केवल सफाई का कार्य नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और सतत विकास की दिशा में एक आवश्यक पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने घरों, विश्वविद्यालय परिसर एवं समाज में कचरा पृथक्करण के प्रति जागरूकता फैलाने तथा स्वच्छता की आदतों को दैनिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें
कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. अर्चना जैन ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में कृषि विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पी. एल. प्रजापति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. योगेश चतुर्वेदी ने किया। व्याख्यान के माध्यम से विद्यार्थियों को कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक पद्धतियों, पर्यावरणीय जिम्मेदारियों तथा स्वच्छ परिसर एवं स्वच्छ समाज के निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में भूगर्भशास्त्र, दर्शनशास्त्र, कृषि, विधि एवं अन्य अध्ययनशालाओं के लगभग दो सौ विद्यार्थी एवं शैक्षणिक स्टाफ शामिल हुआ।

