Sidhi news:मोगली पलटन के तीन वर्ष: गाँधीवादी मूल्यों और नव-निश्चयवाद के समन्वय से गढ़ी जा रही संवेदनशील नई पीढ़ी

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Sidhi news:पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समागम से बाल एवं युवा चेतना को दिशा दे रही ऋषिकेश फाउंडेशन की बाल-टोली ‘मोगली पलटन’ ने आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती के अवसर पर अपनी स्थापना के सफल तीन वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। 2 अक्टूबर 2023 को गठित इस पलटन का वैचारिक आधार ‘नव-निश्चयवाद’ (Neo-Determinism) का दर्शन है, जो गाँधीवादी चिंतन से अद्वैत रूप से जुड़ा हुआ है।

महात्मा गाँधी का प्रसिद्ध कथन—”धरती हर मनुष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन किसी के लालच को पूरा करने के लिए नहीं”—नव-निश्चयवाद के मूल सिद्धांतों का ही प्रतिबिंब है। नव-निश्चयवाद भी यही प्रतिपादित करता है कि नव-निश्चयवाद का विचार मानव और प्रकृति के मध्य सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व की वकालत करता है, जहाँ न तो प्रकृति का अंधाधुंध दोहन स्वीकार्य है और न ही विकास की पूर्ण उपेक्षा। मोगली पलटन इन्हीं दोनों दर्शनों के समन्वय से करुणा और कृतज्ञता जैसे मूलभूत मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण एक ज़िम्मेदार एवं संवेदनशील पीढ़ी का निर्माण कर रही है।

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अपनी तीसरी वर्षगाँठ के अवसर पर संस्था ने पिछले 36 महीनों में संचालित अपनी प्रमुख पहलों की प्रगति साझा की है। प्रकृति की अपनी गति और सीमाओं का सम्मान करने का संदेश देने के लिए संस्था द्वारा ‘कछुआ चाल साइकल रैली’ आयोजित की जाती है, जो नव-निश्चयवाद और गाँधीवादी सादगी के दर्शन को जीवंत रूप में प्रतिबिम्बित करती है। प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को आयोजित होने वाली इस पहल का वर्तमान में तीसरा संस्करण गतिमान है, जिसके तहत अब तक संपन्न 27 रैलियों के माध्यम से 2,000 से अधिक बच्चे सम्मिलित होकर संतुलित और संयमित विकास का संदेश दे चुके हैं।

जन-स्वास्थ्य और आर्थिक चेतना के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए संस्था ने ‘मिशन रामबाण’ की शुरुआत की। जेनेरिक दवाओं के प्रति जनजागरूकता फैलाने हेतु आयोजित 10 विशेष साइकल रैलियों में 500 से अधिक बच्चों ने भाग लिया और पर्चों (पेम्फलेट) के वितरण के माध्यम से 5000 से अधिक लोगों तक सुलभ व किफायती स्वास्थ्य सेवा का संदेश पहुँचाया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वावलंबन के क्षेत्र में ‘गाय है तो गाँव है’ अभियान संचालित किया जा रहा है, जो गाँधी जी के ग्राम स्वराज्य के विचार से सीधा मेल खाता है। इसके तहत गोवंश संरक्षण, जैविक खेती, हरित रोज़गार के सृजन तथा स्वास्थ्य लाभ जैसे विषयों पर जनजागरूकता फैलाई जा रही है। इस श्रृंखला में आयोजित 13 साइकल रैलियों में 600 से अधिक बच्चों ने सहभागिता की तथा 2,000 से अधिक लोगों के बीच “गाय की चिट्ठी” वितरित कर सामाजिक संवाद की एक अनूठी पहल की गई।

जैव-विविधता और संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति युवाओं में तत्परता जगाने हेतु पलटन के सदस्यों ने ‘सोन घड़ियाल संरक्षण’ पहल के अंतर्गत 12 घंटे में 100 किलोमीटर की सुदीर्घ साइकिल यात्रा संपन्न की। वहीं बच्चों में वैज्ञानिक मिज़ाज और शोध की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए ‘चाँद की बात’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें इसरो (ISRO) के वैज्ञानिक एवं चंद्रयान टीम के सदस्य अंशुल मिश्रा के साथ जिज्ञासा चर्चा में 300 बच्चों ने भाग लेकर अंतरिक्ष विज्ञान के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।

राष्ट्रीय पर्वों और सामाजिक सरोकारों को पर्यावरणीय चेतना से जोड़ते हुए संस्था ने कई अनूठे आयोजन किए हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आयोजित पर्यावरण सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में 10 विद्यालयों के 2,000 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक माह के किसी विशिष्ट दिवस पर केंद्रित ‘आज कुछ ख़ास है’ कार्यशालाओं के 13 आयोजनों के माध्यम से 600 बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा गया।

पारंपरिक त्योहारों के व्यावहारिक महत्व और उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक आधार को स्पष्ट करने के लिए ‘त्योहार का व्योहार’ नामक 6 कार्यशालाएँ आयोजित की गईं, जिनसे 300 बच्चे लाभान्वित हुए। साथ ही, रक्षाबंधन के अवसर पर पिछले तीन वर्षों से निरंतर चलाए जा रहे ‘सुरक्षा बंधन’ अभियान के तहत 100 से अधिक बच्चों ने 150 से अधिक वृक्षों को रक्षासूत्र बाँधकर उनके संरक्षण का संकल्प लिया।

संस्था के प्रतिनिधियों का कहना है कि मोगली पलटन केवल एक संगठन नहीं, बल्कि यह विचार है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी नहीं हैं। नव-निश्चयवाद और गाँधी जी का दर्शन हमें यही सिखाता है कि हम प्रकृति की सीमाओं के भीतर रहकर ही सतत विकास कर सकते हैं। संस्था का अंतिम लक्ष्य बच्चों के भीतर करुणा और कृतज्ञता के भावों को रोपना है ताकि वे आने वाले कल के संवेदनशील इंसान बन सकें। मोगली पलटन आगामी वर्षों में भी इस यात्रा को और अधिक व्यापक बनाने तथा दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों तक अपनी पहलों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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