Rewa news: रीवा : राजनीति की तासीर ऐसी है कि यहाँ न तो समीकरण स्थायी होते हैं और न ही किसी शख्सियत पर लगा ठप्पा। कल तक जिसके नाम के साथ जिलाबदर का टैग जुड़ा था, आज वही शख्स रीवा की गलियों और सार्वजनिक मंचों पर “जनहित के पहरेदार” की भूमिका में ताल ठोक रहा है।
अतीत के कानूनी पन्नों में जो नाम प्रशासनिक कार्रवाई के लिए सुर्खियों में रहा, आज वही सड़क, बिजली, पानी और बदहाल व्यवस्था पर हुंकार भर रहा है। रीवा के सियासी हलकों में अब एक ही सवाल तैर रहा है—कुंजी वही है, तो क्या इस बार बंद सियासी ताला खोलने की तैयारी है?
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‘तड़ीपार’ की पलटी कुंडी कल दूरियाँ, आज जनता के द्वार
कभी कानूनी बंदिशों और प्रशासनिक शिकंजे के कारण क्षेत्र से दूर रहने वाले कुंज बिहारी तिवारी की सक्रियता अब सोशल मीडिया से लेकर ज़मीन तक साफ़ देखी जा सकती है।
जनसमस्याओं पर घेराबंदी खस्ताहाल सड़कों के गड्ढे गिनवाना हो या बिजली-पानी की किल्लत पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करना—स्थानीय मुद्दों पर आवाज़ बुलंद की जा रही है।
पहचान का मेकओवर कभी जिसकी चर्चा पुलिस रिकॉर्ड्स के हवाले से होती थी, आज उसकी चर्चा जनता के बीच उठ रहे मुद्दों से हो रही है। समय बदला तो पहचान का बोर्ड भी बदल गया, लेकिन रीवा की जनता इस अचानक आए ‘हृदय परिवर्तन’ को उत्सुकता और हैरानी दोनों नज़रों से देख रही है।
दो फाड़ में बँटी राय: हृदय परिवर्तन या छवि चमकाने का पैंतरा?
इस नई पारी को लेकर स्थानीय राजनीति और आम जनता के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है समर्थकों का दावा:यह आत्ममंथन, बदलाव और जनसेवा की नई शुरुआत है। इंसान अपने अतीत से सीखकर समाज के लिए बेहतर काम कर सकता है।”
लोगो का आरोप है कि
यह कानून के शिकंजे से बचने और आगामी राजनीतिक जमीन तलाशने का नया पैंतरा है। जनहित की यह घंटी सिर्फ अपने बंद राजनीतिक दरवाज़े खोलने के लिए बजाई जा रही है।
पुलिस प्रशासन का रुख: आरोप निराधार, तूल देने की कोशिश”
हाल ही में रीवा के सिटी हॉस्पिटल में आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा के साथ कुंज बिहारी तिवारी भी पहुँचे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इन्हें हिरासत में लेकर बिछिया थाने भेजा। इसके बाद कुंज बिहारी तिवारी ने पुलिस पर थाने के भीतर मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाए।
इस मामले पर रीवा शहर के सीएसपी राजीव पाठक ने सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करते हुए आरोपों का खंडन किया है प्रशासनिक सफाई: सीएसपी राजीव पाठक ने स्पष्ट किया कि कुंज बिहारी तिवारी द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। सम्मानजनक व्यवहार: घटना के दौरान वे स्वयं मौके पर मौजूद थे। सभी से शांतिपूर्वक बात की गई और सम्मानपूर्वक बिठाया गया।
राजनीतिक तूल देने का प्रयास: थाना प्रभारी विजय सिंह या किसी अन्य पुलिसकर्मी द्वारा कोई मारपीट नहीं की गई है। पुलिस के मुताबिक, मामले को राजनीतिक मोड़ देने के लिए इस तरह के मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं।
किरदार बदला है या सिर्फ प्रचार?
कानूनी प्रक्रियाओं की अपनी तय गति है और अदालत के पन्ने जनसेवा का चोला ओढ़ने से नहीं बदलते। लेकिन राजनीति का गणित अलग होता है, जहाँ जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी कसौटी है। पूर्व में तड़ीपार हो चुके कुंज बिहारी तिवारी ने जनहित का ताला खोलने का दावा तो ठोक दिया है, लेकिन रीवा की जागरूक जनता इतनी नादान नहीं है। आवाज़ उठाना और जनता के साथ खड़ा होना स्वागत योग्य है, लेकिन जब अतीत का साया भारी हो, तो नीयत पर सवाल उठना लाजमी है। आने वाला वक्त ही यह साबित करेगा कि यह बदलाव वास्तविक है या महज एक सियासी कमबैक की पटकथा।
नईगढ़ी के तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश सिंह ने लिखा था जिला बदर करने को पत्र



