Post office: निजीकरण और शोषण के खिलाफ आर-पार की जंग: भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ का रीवा सहित देश में राष्ट्रव्यापी आंदोलन

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Post office; भारतीय डाक विभाग के इतिहास में एक और बड़े संघर्ष का बिगुल आज रीवा में फूंक दिया गया है। रीवा डाक विभाग के समस्त कर्मचारी शाम 6:00 बजे डाक कार्यलय के बाहर कार्य के बाद एकजुट होकर आंदोलन की चेतावनी दे दी है ।राष्ट्रहित, विभाग हित और श्रमिक हित का नारा बुलंद करते हुए भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ’ ने विभाग को बर्बादी से बचाने और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है।

कर्मचारियों का आरोप है कि विदेशी कंपनी ‘मैकिन्जी’ के इशारे पर डाक विभाग का निजीकरण करने की साजिश रची जा रही है। साथ ही, टारगेट पूरा करने के नाम पर कर्मचारियों पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है, यहाँ तक कि उन्हें अपने खुद के पैसे से खाते खुलवाने पर मजबूर किया जा रहा है। इसी तानाशाही और शोषण के खिलाफ डाक कर्मचारियों ने चरणबद्ध तरीके से सड़क पर उतरने का फैसला किया है।

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महासंघ ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए 20 जुलाई से 18 अगस्त 2026 तक के आंदोलन का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है
20 से 27 जुलाई 2026: कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए कार्य करेंगे।
28 जुलाई 2026: को लंच के समय सभी मंडलीय कार्यालयों पर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।

5 अगस्त 2026 को देशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल की जाएगी, जिससे डाक सेवाएं ठप होंगी।
18 अगस्त 2026: को मांगें पूरी न होने पर इस दिन से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होगी।

डाक कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन के सामने 9 सूत्रीय मांगें रखी हैं, जो उनके अस्तित्व और विभाग के भविष्य से जुड़ी हैं:
1. टारगेट के नाम पर शोषण बंद हो:विभागीय और जी.डी.एस. कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि वे डाकघर और रेल डाक सेवा में अपनी ड्यूटी के लिए भर्ती हुए हैं, न कि गली-गली घूमकर और अपने वेतन के पैसे से खाते खोलकर टारगेट पूरा करने के लिए।

2. रेल डाक सेवा (RMS) को पुनः बहाल किया जाए: प्रधानमंत्री की उद्घोषणा के बावजूद रेल डाक सेवा के बजाय मेल को RTN रोड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से भेजा जा रहा है। मांग है कि इसे बंद कर पुनः रेल के माध्यम से मेल भेजा जाए, जिससे सरकारी पैसा निजी हाथों में जाने के बजाय रेलवे सरकारी विभाग को मिले।
3. रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती: मेल मोटर सेवा और सिविल विंग Dying Cadre को खत्म करके के सभी खाली पदों को जल्द से जल्द भरा जाए।
4. भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: डाक विभाग में बढ़ रहे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर कठोर कार्रवाई हो और इस विषय में यूनियन प्रतिनिधियों से वार्ता की जाए।

5. कैडर रीस्ट्रक्चरिंग और विकेंद्रीकरण पर रोक:पोस्टल एकाउंट्स का विकेंद्रीकरण और PACO/PARO का विलय रोका जाए। मुंबई विदेश डाकघर की तरह दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता में भी एलएसजी कैडर तथा प्रमोशन के प्रावधान लागू हों।

6. वेतन विसंगति का समाधान: भूतपूर्व सैनिकों जो विभाग में भर्ती हुए हैं, उनकी वेतन विसंगतियों को तुरंत ठीक किया जाए।

7. मृतक आश्रितों को न्याय: 5 प्रतिशत सीलिंग के कारण जिन मृतक आश्रितों को नौकरी नहीं मिल सकी है, उन्हें जी.डी.एस. के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए।

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8. पुरानी व्यवस्था की वापसी: N.D.C. सिस्टम को खत्म कर पुरानी डिलीवरी व्यवस्था को दोबारा लागू किया जाए।

9. श्रम का सम्मान: 17 सितंबर (
भगवान विश्वकर्मा जयंती को ‘राष्ट्रीय श्रम दिवस’ घोषित किया जाए।

यह लड़ाई सिर्फ कर्मचारियों के हक की नहीं, बल्कि देश की सबसे पुरानी और भरोसेमंद सरकारी सेवा ‘भारतीय डाक’ को निजी हाथों में जाने से बचाने की है।
आज दिनांक 17 जुलाई को रीवा प्रधान डाक घर में भारतीय मजदूर संघ
जिसमें रीवा संभागीय सचिव ज्ञानेश्‍वर कुशवाहा ग्रुप सी एवं शकरकर्षण तिवारी ,प्रेमशंकर चतुर्वेदी रजनीश तिवारी उपस्थित रहे।

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