बेटी की शादी में अब सरकार देगी 8 ग्राम सोना; मुफ्त LPG गैस बिजली फ्री का वादा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले अभिनेता जोसेफ विजय, जिन्हें उनके प्रशंसक “थलपति विजय” के नाम से जानते हैं, ने अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ जबरदस्त प्रदर्शन किया है।
234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया है। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें दूर है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि विजय का तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। इस नतीजे ने न केवल राज्य बल्कि पड़ोसी देश श्रीलंका तक राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, जहां विजय की लोकप्रियता पहले से ही काफी मजबूत मानी जाती है।
चुनावी वादों ने बढ़ाई आर्थिक बहस
विजय और उनकी पार्टी ने चुनाव प्रचार के दौरान कई बड़े और आकर्षक वादे किए थे, जिनका सीधा असर आम जनता पर पड़ता दिख रहा है। लेकिन अब इन वादों के वित्तीय प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी योजनाओं को लागू करने पर तमिलनाडु सरकार पर लगभग ₹42,000 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य पहले से ही वित्तीय दबाव में है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तमिलनाडु का राजकोषीय घाटा लगभग ₹1.22 लाख करोड़ यानी राज्य के GSDP का करीब 3% रहने का अनुमान है। ऐसे में नए खर्चों की यह लहर राज्य की आर्थिक स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।
महिलाओं की सहायता योजना सबसे बड़ा खर्च
TVK का सबसे प्रमुख वादा महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता से जुड़ा है। पार्टी ने इस योजना के तहत मासिक सहायता ₹1,000 से बढ़ाकर ₹2,500 करने का ऐलान किया है।
इस बदलाव के बाद इस योजना पर सालाना खर्च ₹14,411 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹36,029 करोड़ तक पहुंच सकता है। यानी केवल इसी एक योजना से सरकार पर करीब ₹21,617 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
बिजली, पेंशन और सब्सिडी से बढ़ेगा दबाव
मुफ्त बिजली की सीमा 100 यूनिट से बढ़ाकर 200 यूनिट करने का वादा भी बड़ा खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। इससे सब्सिडी का खर्च ₹7,752 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹12,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
इसी तरह पेंशन योजनाओं में भी बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। बुजुर्ग पेंशन को ₹1,200 से बढ़ाकर ₹3,000 करने से लाखों लाभार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा। विधवा और दिव्यांग पेंशन में भी वृद्धि से राज्य का सामाजिक कल्याण बजट और बढ़ेगा।
सबसे चर्चित वादा: शादी में 8 ग्राम सोना
TVK के चुनावी वादों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस योजना की हो रही है, वह है “शादी में 8 ग्राम सोना” देने का वादा।
इस योजना के तहत पात्र परिवारों को विवाह के समय 8 ग्राम सोना सरकार की ओर से दिया जाएगा। यह वादा खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बेहद आकर्षक माना जा रहा है, क्योंकि भारत में शादी में सोने का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है।
पहले से ही तमिलनाडु में यह योजना आंशिक रूप से लागू है, जिसमें कन्याओं को विवाह सहायता के साथ सोना दिया जाता है। लेकिन इसे और व्यापक रूप में लागू करने की बात से यह अब सबसे चर्चित चुनावी वादा बन गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना पर वर्तमान में करीब ₹600 करोड़ का खर्च आता है, लेकिन यदि इसे बड़े पैमाने पर विस्तारित किया गया तो इसका वित्तीय प्रभाव और बढ़ सकता है।
मुफ्त LPG और किसानों के लिए सहायता
हर परिवार को साल में 6 मुफ्त LPG सिलेंडर देने का वादा भी बड़ी वित्तीय चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इस योजना पर लगभग ₹7,074 करोड़ सालाना खर्च आने का अनुमान है।
इसके अलावा किसानों को ₹15,000 सालाना सहायता देने की योजना से भी अतिरिक्त करोड़ों रुपये का बोझ पड़ेगा। हालांकि इसमें कुछ हिस्सा केंद्र सरकार की PM-KISAN योजना से समायोजित हो सकता है।
स्वास्थ्य और अन्य योजनाएं
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़े सुधार का वादा किया गया है। हर परिवार को ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर देने की योजना से भी राज्य के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
इन सभी योजनाओं को जोड़ने पर राज्य की वित्तीय स्थिति और जटिल हो सकती है, खासकर तब जब राजस्व पहले से सीमित हो।
सामाजिक बजट में गिरावट से बढ़ी चिंता
रिपोर्टों के अनुसार तमिलनाडु में सामाजिक क्षेत्र पर खर्च पहले ही घटकर 2025-26 में लगभग 34% रह गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत करीब 42% है। ऐसे में नए वादों को लागू करना सरकार के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, थलपति विजय की पार्टी TVK के चुनावी वादे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय साबित हुए हैं। महिलाओं की आर्थिक सहायता, मुफ्त LPG सिलेंडर, पेंशन वृद्धि और खासकर “शादी में 8 ग्राम सोना” जैसी योजनाएं सीधे आम जनता को आकर्षित कर रही हैं।
लेकिन दूसरी ओर, इन सभी योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि तमिलनाडु सरकार लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन कैसे बनाती है।
