रीवा – सीधी में मौसम का कहर: भीषण ओलावृष्टि, गाड़ियों के कांच टूटे, किसानों की फसल तबाह

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रीवा – सीधी में मौसम का कहर : मध्य प्रदेश के रीवा और सीधी जिलों में आज मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप लिया, जिसने ग्रामीण इलाकों में भारी तबाही मचा दी। दोपहर के समय तेज आंधी-तूफान के साथ शुरू हुई बारिश देखते ही देखते ओलावृष्टि में बदल गई। कई गांवों में बर्फ जैसे बड़े-बड़े ओले गिरने लगे, जिससे खेत, खलिहान, मकान और सड़क पर खड़े वाहन बुरी तरह प्रभावित हुए।

सीधी जिले के पखुड़ी (बरखुड़ी) गांव और आसपास के इलाकों में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। यहां ओलों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि लोगों को लगा जैसे बर्फबारी हो रही हो। गांव की सड़कों, खेतों और घरों के आसपास चारों तरफ ओले ही ओले नजर आए।

रीवा – सीधी में मौसम का कहर गाड़ियों के कांच टूटे, सड़क पर खौफनाक मंजर

ओलावृष्टि के दौरान कई वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। सीधी की ओर जा रहे लोगों ने बताया कि चिहिया घाटी के पास अचानक तेज बारिश और ओलों की बौछार शुरू हो गई। ओलों के प्रहार से कई गाड़ियों के शीशे टूट गए।

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एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि उनकी कार का सामने का कांच पूरी तरह चकनाचूर हो गया। कुछ ही मिनटों में हालात इतने बिगड़ गए कि सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया।
किसानों पर दोहरी मार: फसल और भूसा दोनों बर्बाद

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इस ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को पहुंचाया है। पहले से खेतों में तैयार खड़ी फसलें और खलिहान में रखा गेहूं का भूसा बुरी तरह प्रभावित हुआ।

रीवा – सीधी में मौसम का कहर आम के पेड़ों पर लगे फल पूरी तरह झड़ गए

गेहूं की फसल भीगकर खराब हो गई खलिहान में रखा अनाज और भूसा भीगकर सड़ने की स्थिति में पहुंच गया

ग्रामीणों का कहना है कि इस समय कई किसानों की फसल पूरी तरह तैयार थी, लेकिन अचानक आए इस मौसम ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

कच्चे मकान और खपरेल छतें टूटीं

ओलों की मार सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं रही। कई गांवों में कच्चे मकानों की खपरेल छतें टूट गईं।

घरों की छतों में छेद हो गए

दीवारों को भी नुकसान पहुंचा

कई परिवारों को सुरक्षित जगहों पर शरण लेनी पड़ी

गांवों में रहने वाले लोगों ने बताया कि इतनी तेज ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी गई।

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मवेशियों पर भी पड़ा असर

ओलों की तेज चोट से कई मवेशी भी प्रभावित हुए। ग्रामीणों के अनुसार:

कुछ पशु खेतों में ही गिर गए

कई मवेशी चोटिल हो गए

पशुपालकों को भारी नुकसान हुआ

यह स्थिति ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए और भी चिंता का विषय बन गई है।

रीवा के कई गांव भी प्रभावित

इस प्राकृतिक आपदा का असर सिर्फ सीधी जिले तक सीमित नहीं रहा। रीवा जिले के गुड़, रायपुर कर्चुलियान और आसपास के कई गांवों में भी भारी ओलावृष्टि दर्ज की गई।

यहां भी किसानों की फसल, आम के बाग और ग्रामीण संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचा है।

ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले मुआवजा

इस भारी नुकसान के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत मदद की मांग की है। गांव बांस के निवासी परमानंद मिश्रा ने बताया:

“ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसल, भूसा और मवेशियों को भारी नुकसान हुआ है। कई लोगों के घर और गाड़ियां भी टूट गई हैं। सरकार को जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।”

ग्रामीणों ने मांग की है कि: रीवा – सीधी में मौसम का कहर

प्रशासन मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करे

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किसानों को आर्थिक सहायता दी जाए

पशुपालकों को भी राहत पैकेज मिले

मौसम ने दी राहत भी, लेकिन नुकसान भारी

हालांकि इस बारिश और ओलावृष्टि से भीषण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत किसानों और ग्रामीणों के लिए महंगी साबित हुई।

एक तरफ तापमान में गिरावट आई, तो दूसरी तरफ फसलों और संपत्ति का भारी नुकसान हो गया।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल स्थानीय प्रशासन की ओर से नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से ग्रामीण इलाकों में तबाही के दृश्य सामने आए हैं, उससे साफ है कि नुकसान काफी व्यापक है।

अब देखना होगा कि प्रशासन कितनी जल्दी राहत कार्य शुरू करता है और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचती है या नहीं।

रीवा और सीधी जिलों में आई यह अचानक ओलावृष्टि एक बड़ी प्राकृतिक आपदा बनकर सामने आई है। किसानों, पशुपालकों और ग्रामीणों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में समय पर सरकारी सहायता ही इन लोगों के लिए राहत का एकमात्र सहारा बन सकती है।

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