Mp bhopal: विंध्य की लोक संस्कृति की ‘संभावना’: भोपाल में गूंजी बघेली गीतों की मधुर गूँज
Mp bhopal:राजधानी के सांस्कृतिक गलियारों में उस समय विंध्य की माटी की सोंधी महक बिखर गई, जब मध्य प्रदेश जनजातीय संग्रहालय के प्रतिष्ठित संभावना’ कार्यक्रम के मंच पर रीवा की प्रख्यात लोकगायिका रीता तिवारी ने अपनी जादुई आवाज का जादू बिखेरा। यह आयोजन केवल एक गायन प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि आधुनिकता की आंधी में ओझल हो रही बघेली विरासत को सहेजने का एक सशक्त शंखनाद था।
*बिगत 26 अप्रैल को आयोजित इस कार्यक्रम में रीता तिवारी ने उन लोकगीतों को स्वर दिया, जो अब केवल बुजुर्गों की स्मृतियों तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने अपने कार्यक्रम की शुरुआत मंगलकारी गणेश वंदना से की, जिसके बाद संस्कारों और उत्सवों की एक लंबी लड़ी पिरोई।
प्रस्तुति के मुख्य आकर्षण रहे:
सोहर और बधाई जन्म के उल्लास को दर्शाते पारंपरिक गीत।
तिलकोत्सव और विवाह गीत:बघेली वैवाहिक रस्मों की बारीकियों को बयां करते मधुर स्वर।
संस्कार गीत: जीवन के विभिन्न पड़ावों पर गाए जाने वाले वे गीत, जो अब लुप्त होने की कगार पर हैं।
80 वर्षीय माँ की विरासत को मिला नया आयाम
रीता तिवारी की कला का सबसे प्रेरणादायक पहलू उनकी जड़ें हैं। उन्होंने बताया कि बघेली गीतों की यह अमूल्य थाती उन्हें अपनी 80 वर्षीय पूज्य माताजी से विरासत में मिली है। आज भी इस उम्र में उनकी माताजी न केवल उन्हें प्रोत्साहित करती हैं, बल्कि गीतों की शुद्धता और उनके पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाती हैं। युवा पीढ़ी, जो अपनी जड़ों से कट रही है, उनके लिए रीता तिवारी का यह प्रयास एक आदर्श उदाहरण है।
कार्यक्रम के अंत में रीता तिवारी ने इस महत्वपूर्ण मंच के लिए जनजातीय संग्रहालय के संग्रहालयाध्यक्ष अशोक मिश्रा विकास सहित समस्त प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ऐसे मंच ही हमारी लोक कलाओं को जीवित रखने का सामर्थ्य रखते हैं। आज जब हमारी लोक भाषाएँ और गीत गुम हो रहे हैं, तब इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सेतु बनते हैं।
