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Nasha mukt bharat: असम के युवा पल्लव देव का संकल्प: नशा मुक्त भारत के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक की पदयात्रा, सेना में जाने का था सपना, अब कर रहे हैं देश की सेवा

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नाश mukt bharat: भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना केवल सरकारी नीतियों से नहीं, बल्कि युवाओं के दृढ़ संकल्प से सच होता है। असम के श्रीभूमि जिले के रहने वाले एक युवा, पल्लव देव, इसी संकल्प को लेकर पूरे भारत की पदयात्रा पर निकले हैं। उनका एकमात्र उद्देश्य है नशा मुक्त भारत”

सेना में जाने का था सपना, अब कर रहे हैं देश की सेवा Nasha mukt bharat

पल्लव देव का प्रारंभिक सपना भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करना था। हालांकि, कलर ब्लाइंडनेस की समस्या के कारण वह सेना में नहीं जा सके। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पल्लव का मानना है कि यदि वह सेना की वर्दी पहनकर सीमा पर तैनात नहीं हो सकते, तो वह सड़कों पर चलकर देश के युवाओं को नशे के चंगुल से बचाकर भी देश की सेवा कर सकते हैं।

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एक लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा: Nasha mukt bharat

पल्लव ने अपनी यात्रा 5 मई 2025 को असम से शुरू की थी। अब तक वह लगभग 325 दिनों से निरंतर चल रहे हैं और 7 राज्यों में असम, मेघालय, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का सफर तय कर चुके हैं। उनकी यह यात्रा अभी कई वर्षों तक चलने वाली है, जिसमें उन्हें 5 से 6 साल का समय लग सकता है।

नशे के खिलाफ एक कड़ा संदेश

पल्लव अपनी यात्रा के दौरान स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जाकर लोगों को जागरूक करते हैं। उनका कहना है।

हमारे देश के युवाओं का सबसे बड़ा दुश्मन ‘नशा’ है। अगर युवा नशे से दूर रहेंगे, तभी वे ओलंपिक में गोल्ड मेडल ला पाएंगे और भारत को आगे ले जा पाएंगे।”

उनका मानना है कि यदि वह इतना भारी वजन उठाकर पैदल चल पा रहे हैं, तो इसका श्रेय उनकी नशा मुक्त जीवनशैली को जाता है। वह युवाओं को गुटखा और अन्य छोटे नशों से भी दूर रहने की सलाह देते हैं क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं।

जनता और प्रशासन का सहयोग

पल्लव बताते हैं कि इस कठिन यात्रा में उन्हें आम जनता और प्रशासन का भरपूर सहयोग मिल रहा है। जब वह किसी समस्या में होते हैं या रात को ठहरने की बात आती है, तो स्थानीय लोग और पुलिस उनकी मदद के लिए आगे आते हैं। लोगों का प्यार ही उन्हें हर दिन नए जोश के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देता है।

पल्लव देव की यह पदयात्रा केवल एक शारीरिक सफर नहीं है, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। उनकी यह हिम्मत हमें याद दिलाती है कि यदि इरादे नेक हों, तो कोई भी बाधा हमें अपने लक्ष्य से नहीं रोक सकती।

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