Rewa news:पत्रकारिता पर हमला: क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित है? रीवा प्रशासन से सीधा सवाल!
Rewa news: रीवा – लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हो रहे हमले अब बर्दाश्त से बाहर हैं. रीवा में, कुछ यूट्यूबर्स ने पत्रकारिता की गरिमा को जिस तरह पैरों तले रौंदा है, वह न सिर्फ शर्मनाक है, बल्कि यह कानून और व्यवस्था पर भी एक बड़ा सवालिया निशान है. हाल ही में, यूट्यूबर आशीष यादव( पियांसु ) द्वारा जारी किया गया वीडियो, जिसमें एक पत्रकार को खुलेआम पैसे लेते दिखाया गया है, महज़ एक कॉमेडी नहीं, बल्कि यह समाज में अविश्वास और अराजकता फैलाने की एक सोची-समझी साजिश है.
यह सिर्फ एक मजाक नहीं, यह एक अपराध है!
यह समझना ज़रूरी है कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह कानूनी धाराओं के तहत एक गंभीर अपराध है. किसी भी पेशेवर समूह को इस तरह से बदनाम करना, उनकी छवि को धूमिल करना, और समाज में यह झूठी धारणा फैलाना कि पत्रकार बिकाऊ होते हैं, सीधे तौर पर मानहानि और अफवाह फैलाने का मामला है.
प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना, इन लोगों को और भी शह दे रहा है. पहले टीआरएस कॉलेज की छात्राओं पर अश्लील गाना, फिर सेना पर टिप्पणी और अब पत्रकारिता पर हमला. इन घटनाओं की एक लंबी श्रृंखला साफ तौर पर दिखाती है कि अगर समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो कल ये किसी और संवैधानिक संस्था का मज़ाक उड़ाएंगे.
सच्चाई को कब तक दबाया जाएगा?
हम जानना चाहते हैं कि प्रशासन इस मामले में अब तक क्यों चुप है? क्या कानून सिर्फ आम नागरिकों के लिए है और सोशल मीडिया के ये स्वयंभू ‘सुपरस्टार’ इससे ऊपर हैं?
रीवा के मीडिया की यह मांग है कि रीवा पुलिस और प्रशासन तुरंत इस मामले का संज्ञान ले. संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए और आशीष यादव जैसे कंटेंट क्रिएटर्स पर सख्त कार्रवाई हो.
यह समय है कि समाज और सरकार मिलकर यह संदेश दें कि पत्रकारिता कोई मज़ाक नहीं है. यह एक मिशन है, और इस पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. रीवा के लोगों को भी यह तय करना होगा कि क्या वे ऐसे लोगों का समर्थन करेंगे, जो उनके ही शहर की पहचान को खराब कर रहे हैं?
