रीवा रियासत: एक ऐतिहासिक वैभव और प्राकृतिक सौंदर्य की अनूठी धरती जाने..?
रीवा रियासत अपनी ऐतिहासिक धरोहर प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक पहचान के कारण मध्य प्रदेश का एक अद्भुत शहर माना जाता है यहां की यात्रा आपको भाव विभोर कर देगी।

Rewa News: मध्यप्रदेश का रीवा जिला इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का एक अद्भुत संगम है। इसे "सफेद बाघों की भूमि" के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि भारत का पहला सफेद बाघ यहीं पर पाया गया था। यह जिला केवल ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों और मनोरम जलप्रपातों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अनूठी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। आइए, जानते हैं रीवा की ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक खासियतें जो इसे मध्यप्रदेश का एक अनमोल रत्न बनाती हैं।
रीवा का ऐतिहासिक गौरव
रीवा का इतिहास शौर्य, समृद्धि और संस्कृति से भरपूर है। विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित यह क्षेत्र प्राचीन काल में विंध्य प्रदेश का हिस्सा था। यहां के बघेल राजाओं ने लंबे समय तक शासन किया और रीवा को एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व प्रशासनिक केंद्र बनाया।
रीवा किला – यह ऐतिहासिक किला रीवा राजाओं की भव्यता और शक्ति को दर्शाता है। किले की स्थापत्य कला और इतिहास इसे देखने लायक बनाते हैं।
गोविंदगढ़ किला और झील – यह खूबसूरत किला और झील शाही विरासत की झलक प्रस्तुत करते हैं।
देवतालाब मंदिर – अपनी अनूठी वास्तुकला और आध्यात्मिक महत्व के कारण यह मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
प्राकृतिक सौंदर्य और प्रमुख पर्यटन स्थल
रीवा की धरती प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। यहां के झरने, पहाड़ और वन्य क्षेत्र इसे प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग जैसा बनाते हैं।
केवटी जलप्रपात – मानसून में इस झरने का विहंगम दृश्य किसी जादुई नज़ारे से कम नहीं होता।
बहुती जलप्रपात – इसे "मध्यप्रदेश का नियाग्रा फॉल" कहा जाता है। इसकी भव्यता और गहराई इसे खास बनाती है।
चचाई जलप्रपात – 130 मीटर ऊंचाई वाला यह झरना प्रदेश के सबसे ऊंचे जलप्रपातों में से एक है।
तोपेन जलप्रपात – जंगलों के बीच स्थित यह जलप्रपात शांति और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा मिश्रण है।
रीवा की सांस्कृतिक धरोहर
रीवा अपनी सांस्कृतिक विविधता और लोककलाओं के लिए जाना जाता है। यहां के पारंपरिक लोकगीत, नृत्य और कला की गूंज दूर-दूर तक सुनाई देती है।
बघेली लोकगीत और नृत्य – यहां की बघेली भाषा में गाए जाने वाले लोकगीत और पारंपरिक नृत्य रीवा की सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए हैं।
रीवा घराना – भारतीय शास्त्रीय संगीत में रीवा घराने का विशेष योगदान रहा है।
पारंपरिक हस्तशिल्प – यहां के स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प वस्तुएं रीवा की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं।
आधुनिक विकास की ओर बढ़ता रीवा
रीवा केवल अपने इतिहास और प्रकृति के लिए ही नहीं, बल्कि अपने आधुनिक विकास के लिए भी चर्चा में है।
रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्लांट – यह भारत के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्रों में से एक है, जो रीवा को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना रहा है।
शिक्षा और उद्योग – रीवा में उच्च शिक्षा के लिए प्रतिष्ठित संस्थान और औद्योगिक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिससे यहां के युवाओं को रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
रीवा अपनी ऐतिहासिक धरोहर, प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक पहचान के कारण मध्यप्रदेश का एक अद्भुत रत्न है। यहां की यात्रा आपको इतिहास, संस्कृति और प्रकृति की अनोखी दुनिया में ले जाएगी।
रीवा के महान बघेल राजा वीरता और संस्कृति के संरक्षक
रीवा पर बघेल वंश के राजाओं ने शासन किया, जिन्होंने इसे एक समृद्ध सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र बनाया। बघेल वंश की स्थापना राजा व्याघ्रदेव ने की थी, जो चंदेल राजवंश से संबंधित थे। 1597 में महाराजा वीरसिंह देव बघेल ने रीवा को अपनी राजधानी बनाया और इसे शक्ति और कला का केंद्र बनाया। रीवा के शासकों में सबसे प्रसिद्ध राजा रहे महाराजा रघुराज सिंह, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया। वहीं, महाराजा गुलाब सिंह ने शिक्षा, कला और प्रशासन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। रीवा नरेशों ने संगीत और संस्कृति को भी बढ़ावा दिया, जिससे रीवा घराने की स्थापना हुई, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध केंद्र बना। इनके शासनकाल में रीवा ने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से उन्नति की और आज भी उनकी विरासत इस भूमि पर देखी जा सकती है।
क्या आपने कभी रीवा की यात्रा की है? अपने अनुभव हमें कमेंट में जरूर बताएं! आपका ध्यानवाद।