Rewa News: मध्यप्रदेश में शहरों, कस्बों और गांवों के नाम बदलने की एक नई लहर देखने को मिल रही है। मुस्लिम आक्रांताओं या उर्दू-अरबी जुड़ाव वाले नामों को हटाकर पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इसी कड़ी में अब एक बड़े शहर, रीवा, का नाम बदलने की मांग उठी है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना, बल्कि विधानसभा में भी उठा।

विधानसभा में गूंजी रीवा का नाम बदलने की मांग

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक अजय सिंह ने विधानसभा में रीवा का नाम 'समदड़िया' करने की मांग रखी। उन्होंने यह तर्क दिया कि शहर के लोग इसकी पहचान बदलना चाहते हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस पार्टी, जो अब तक बीजेपी सरकार द्वारा नाम बदलने की नीति की आलोचना करती रही है, अब उसके ही एक नेता ने इसी राह पर कदम बढ़ा दिया है।

नाम बदलने की राजनीति एक नया ट्रेंड?

मध्यप्रदेश में बीजेपी सरकार ने उत्तर प्रदेश की तर्ज पर कई जिलों, कस्बों और गांवों के नाम बदले हैं। उदाहरण के लिए:

होशंगाबाद का नाम बदलकर नर्मदापुरम रखा गया।

शमशाबाद को अब श्यामपुर कहा जाता है।

इस्माइलखेड़ी अब ईश्वरपुर बन चुका है।

देवास जिले में एक साथ 54 गांवों के नाम बदले गए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले भी कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में गांवों और कस्बों के नाम बदलने की घोषणा कर चुके हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने हमेशा विरोध जताया है, लेकिन अब उनके ही विधायक ने रीवा का नाम बदलने की वकालत कर दी है।

रीवा को 'समदड़िया' बनाने की राजनीति

अजय सिंह ने यह मांग तब उठाई जब सतना पॉलिटेक्निक की जमीन समदड़िया बिल्डर्स को देने का मामला गर्माया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समदड़िया समूह को विशेष लाभ पहुंचाने का काम किया है, और इसी संदर्भ में रीवा का नाम 'समदड़िया' किए जाने की मांग उठाई।

क्या यह नाम बदलने का असली कारण है?

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि रीवा का नाम बदलने की यह मांग सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट भी हो सकता है। क्योंकि इससे पहले कांग्रेस लगातार बीजेपी की नाम बदलने की नीति का विरोध करती आई है, लेकिन अब उसी पार्टी के नेता द्वारा यह मांग करना सवाल खड़े करता है।

क्या नाम बदलने से कोई बदलाव आएगा?

नाम बदलने का मुद्दा केवल राजनीतिक नफा-नुकसान तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्रशासनिक प्रभाव भी पड़ता है। कुछ लोग इसे एक सकारात्मक पहल मानते हैं, जिससे स्थानों को उनकी प्राचीन और गौरवशाली पहचान वापस मिलती है। वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक ध्यान भटकाने का साधन मानते हैं।

क्या रीवा का नाम बदलेगा?

अभी यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मांग को कितनी गंभीरता से लेती है। क्या रीवा का नाम वास्तव में 'समदड़िया' होगा, या यह सिर्फ राजनीतिक चर्चा तक ही सीमित रहेगा? यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

रीवा शहर का नाम रेवा नदी के नाम पर पड़ा था. रेवा नदी को नर्मदा नदी का पौराणिक नाम कहा जाता है. रीवा रियासत की स्थापना बघेल राजपूतों ने लगभग 1400 ईस्वी में की थी. यह रियासत मध्य भारत की एक महत्वपूर्ण रियासत थी।