लक्ष्मण बाग मंदिर रीवा: यह रियासत की पौराणिक धरोहर हैं,जानिए दिलचस्प और भूतिया कहानी
लक्ष्मण बाग मंदिर रीवा का पौराणिक धरोहर, जहां बसते हैं चारों धाम के देवता लेकिन इससे जुड़ी एक भूतों की भी कहानी है। रीवा के इस ऐतिहासिक मंदिर को पुनः संवरना होगा।

Rewa News: रीवा का लक्ष्मण बाग मंदिर न केवल आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह बघेल राजाओं की समृद्ध संस्कृति और भक्ति का प्रतीक भी है। इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना महाराज रघुराज सिंह के समय में हुई थी, और इसका महत्व इतना गहरा है कि इसे 'रीवा का चारधाम' भी कहा जाता है।
चारों धाम के देवताओं की स्थापना का रहस्य
रीवा क्षेत्र चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है, जिससे प्राचीन समय में तीर्थ यात्रा करना बेहद कठिन था। इस कारण बघेल राजाओं ने चारों धाम—बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम—से मूर्तियाँ मंगवाकर इस मंदिर में स्थापित करवाईं। इससे लोगों को चारों धाम का पुण्य लाभ यहीं मिल सके।
युवराज रघुराज सिंह पर प्रेत आत्माओं का साया
माना जाता है कि जब युवराज रघुराज सिंह 17 वर्ष के थे, तब वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। हर संभव उपाय करने के बावजूद भी उनका स्वास्थ्य सुधर नहीं रहा था। तब प्रसिद्ध संत स्वामी मुकुंदाचार्य जी को बुलाया गया। उन्होंने युवराज को देखकर बताया कि उन पर शक्तिशाली प्रेत आत्माओं का साया है।
21 दिनों की साधना और प्रेत बाधा से मुक्ति
स्वामी मुकुंदाचार्य जी ने नदी किनारे पीपल के पेड़ के नीचे 21 दिनों तक कठिन साधना की। उनकी तपस्या से युवराज पूरी तरह स्वस्थ हो गए। इस चमत्कार से प्रसन्न होकर महाराज विश्वनाथ सिंह ने उसी स्थान पर लक्ष्मण बाग मंदिर का निर्माण करवाया और स्वामी मुकुंदाचार्य जी को प्रथम गुरु के रूप में स्थापित किया।
पवित्र बावड़ी और तीर्थ यात्रा का केंद्र
मंदिर परिसर में एक विशाल बावड़ी भी बनवाई गई, जिसमें देशभर की पवित्र नदियों का जल डाला गया। इस जल से भगवान का अभिषेक किया जाता था, और तीर्थ यात्री इसे अपने घर ले जाते थे।
मंदिर की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में लक्ष्मण बाग मंदिर की स्थिति काफी दयनीय हो चुकी है। मंदिर की संरचना क्षतिग्रस्त हो रही है, और कई स्थानों पर जीर्णोद्धार की आवश्यकता है। अगर प्रशासन इस ओर ध्यान दे, तो यह स्थल न केवल धार्मिक बल्कि पर्यटन के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।
होली पर विशेष प्रसाद
होली के दिन यहां प्रसाद ग्रहण करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं, इस दिन मिलने वाले प्रसाद को अर्टिका प्रसाद कहा जाता है। महाराजा रघुराज सिंह ने देश के चारों धाम से मिट्टी व पानी लाकर रीवा में लक्ष्मण बाग की स्थापना भी की थी। यहां पर होली के दिन भक्त पहुंचते हैं और जगन्नाथ जी और राम जी को एक साथ होली खेलते देखते हैं, यह अद्भुत नजारा आपको और कहीं देखने के लिए नहीं मिलेगा
आइए, इस धरोहर को संजोएं!
रीवा के इस ऐतिहासिक मंदिर को संवारने और इसकी गरिमा को पुनः स्थापित करने के लिए सभी को आगे आना होगा। लक्ष्मण बाग मंदिर न केवल हमारी आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा की अमूल्य धरोहर भी है।