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Rewa news: संजय गांधी अस्पताल मे मर गई इंसानियत इलाज’ की जगह ‘गुंडागर्दी’, पत्रकार व बीमार पत्नी के साथ धक्का-मुक्की

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Rewa news: रीवा। विंध्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में संवेदनशीलता और नैतिकता एक बार फिर तार-तार हो गई। बीती रात अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार राजनारायण मिश्रा और उनकी गंभीर रूप से बीमार पत्नी के साथ ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों और सुरक्षा गार्डों द्वारा कथित तौर पर अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई।
विवाद इतना बढ़ा कि इलाज छोड़ पत्रकार को अपनी पत्नी के साथ वहां से वापस लौटना पड़ा।

 

मिली जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ पत्रकार राज नारायण मिश्रा अपनी पत्नी की तबीयत अधिक बिगड़ने पर देर रात अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे थे। उनकी पत्नी का हीमोग्लोबिन स्तर काफी कम होने के कारण वह चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं थीं। परिजनों का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति होने के बावजूद वहां तैनात चिकित्सक और स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया।

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जब पत्रकार ने इलाज में हो रही देरी पर सवाल उठाया, तो अस्पताल का अमला सेवा भाव भूलकर विवाद पर उतारू हो गया।

गार्ड्स और डॉक्टरों पर ‘धौंस’ का आरोप प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के मुताबिक, मौके पर मौजूद सुरक्षा गार्डों ने मरीज के परिजनों के साथ बदसलूकी की। हद तो तब हो गई जब आरोप लगा कि बीमार महिला मरीज को भी धक्का दिया गया। वीडियो में अस्पताल का स्टाफ और कुछ डॉक्टर ऊंची आवाज में बहस करते और पुलिस बुलाने की धमकी देते नजर आ रहे हैं। वहीं, पत्रकार और उनके परिजन हाथ जोड़कर इलाज शुरू करने की गुहार लगाते दिखे, लेकिन सिस्टम की बेरुखी भारी पड़ी।

अस्प्ताल प्रबंधन का पक्ष: डॉक्टरों ने दी हड़ताल की धमकी

मामले के तूल पकड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपना बचाव करते हुए कहा कि परिजनों ने ही डॉक्टरों के साथ अभद्रता की थी। प्रबंधन के अनुसार, जूनियर डॉक्टर इस घटना से इतने आक्रोशित थे कि उन्होंने कार्य बहिष्कार की चेतावनी दे दी थी। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन तब तक मरीज को बिना इलाज के वहां से ले जाया जा चुका था।

प्रशासनिक चुस्ती पर उठे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब संजय गांधी अस्पताल में स्टाफ और तीमारदारों के बीच मारपीट या विवाद की स्थिति बनी हो। करोड़ों के बजट और हाई-टेक सुविधाओं के दावे के बीच अस्पताल की ‘कार्यसंस्कृति’ पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं क्या गंभीर मरीजों के साथ संवेदनहीनता ही इस अस्पताल की नई पहचान है? इलाज मांगने पर परिजनों को गार्डों के जरिए डराना क्या जायज है?

कलेक्टर और कमिश्नर की सख्त हिदायतों के बाद भी क्यों नहीं सुधर रहे हालात , वही इस पूरे मामले पर पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है और दोषी स्टाफ व डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।

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