मध्य प्रदेश

Rewa news: रीवा के स्वास्थ्य विभाग में भूचाल! डिप्टी सीएम के गृह जिले में BJP विधायक ने खोला CMHO के ‘भ्रष्टाचार’ का कच्चा-चिट्ठा, माँगी उच्च-स्तरीय जाँच

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Rewa news: रीवा के स्वास्थ्य विभाग में भूचाल! डिप्टी सीएम के गृह जिले में BJP विधायक ने खोला CMHO के ‘भ्रष्टाचार’ का कच्चा-चिट्ठा, माँगी उच्च-स्तरीय जाँच, डिप्टी सीएम के गढ़ में CMHO पर ‘भ्रष्टाचार का बम’! गुढ़ विधायक ने CM को लिखा विस्फोटक पत्र, माँगी EOW/लोकायुक्त जाँच

रीवा : प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह जिले रीवा में, स्वास्थ्य विभाग के सबसे बड़े अधिकारी CMHO डॉ. संजीव शुक्ला के खिलाफ व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्च-स्तरीय जाँच की माँग उठी है। मध्यप्रदेश के भाजपा के सबसे सीनियर नेता गुढ विधायक नागेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री को एक विस्फोटक पत्र लिखकर यह माँग की है, जिसने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री के रूप में डिप्टी सीएम के प्रभावी क्षेत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तो क्या अब तक डिप्टी स्वास्थ मंत्रालय सम्हालने के विफल साबित रहे है, अब उन्ही के पार्टी के विधायक भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

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विधायक के पत्र के ‘मुख्य बिंदु’:

 

1- अवैध पंजीयन: क्लीनिक और नर्सिंग होम को नियम-कानून ताक पर रखकर दिए गए पंजीयन।
2- आउटसोर्सिंग घोटाला: आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती में भारी मनमानी और नियमों का उल्लंघन।
3 – मनचाहा अटैचमेंट: चिकित्सीय स्टाफ का नियम विरुद्ध संलग्नीकरण (अटैचमेंट), जिससे मूल स्थानों पर स्वास्थ्य सेवाएँ ठप्प।
4- खरीदी में महाघोटाला: दवा और उपकरण खरीदी में भंडार क्रय नियमों का सीधा उल्लंघन, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना।
5- फंड की बंदरबाँट: सी.आर.एम. (CMR) के भ्रमण और अन्य मदों में आवंटित बजट का बिंदुवार दुरुपयोग।

विधायक नागेन्द्र सिंह ने साफ कहा है कि यह मामला जनहित और गंभीर कदाचार से जुड़ा है, जिसकी जाँच किसी भी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे EOW या लोकायुक्त) से कराई जानी चाहिए।

डिप्टी सीएम की चुप्पी पर सवाल: क्या रीवा में ‘सब ठीक है’

यह मामला सीधे तौर पर डिप्टी सीएम और रीवा के कद्दावर नेता राजेंद्र शुक्ल की कार्यशैली पर सवाल उठाता है।रीवा के स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त ये अनियमितताएँ, तब और भी गंभीर हो जाती हैं जब प्रदेश के स्वास्थ्य संबंधी विषयों के महत्वपूर्ण व्यक्ति (डिप्टी सीएम) यहीं से आते हैं और उनकी नज़र हर सुबह, नाला, पुलिया या ज़मीन की तलाश में रहती है, लेकिन विभाग में जमे इस भ्रष्टाचार को सुधारने में वे असफल नज़र आ रहे हैं।”

जनता में यह संदेश जा रहा है कि अगर प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व में शामिल नेता के गृह जिले में ही स्वास्थ्य सेवाएँ भ्रष्टाचार के दलदल में फँसी हैं, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा यह पत्र मुख्यमंत्री के सामने यह स्पष्ट कर देता है कि रीवा में प्रशासनिक सर्जरी की तत्काल आवश्यकता है।

विधायक का पत्र सामने आने के बाद CMHO डॉ. संजीव शुक्ला के पद पर बने रहने को लेकर बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है। अब सारी निगाहें मुख्यमंत्री पर टिकी हैं कि क्या वे डिप्टी सीएम के गृह जिले के इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले पर त्वरित और कठोर कदम उठाएँगे या नहीं।

विपक्ष का पलटवार:

पूर्व कई बार सेमरिया विधायक सहित कांग्रेस पार्टी व अन्य पार्टी के नेता समाजबादी पार्टी शिव सिंह, कांग्रेस पार्टी सुखेन्द्र सिंह बन्ना , कविता पांडेय, विनोद शर्मा, आम आदमी पार्टी , राजीव सिंह शेरा सिंह इस मुद्दे पर आवाज उठा चुके है।

गुढ़ विधायक नागेन्द्र सिंह द्वारा सीएमएचओ डॉ. संजीव शुक्ला के खिलाफ भ्रष्टाचार की उच्च-स्तरीय जाँच की माँग किए जाने के बाद, अब विपक्षी दल इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से भुनाने की तैयारी में हैं। विपक्षी नेताओं ने सीधे तौर पर डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्हें कटघरे में खड़ा किया है।

विपक्ष का तीखा हमला: ‘डबल इंजन’ में डबल भ्रष्टाचार

विपक्षी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि रीवा स्वास्थ्य विभाग का यह ‘महाघोटाला’ बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है।
“डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल, जो स्वयं रीवा से आते हैं और प्रदेश की सरकार में एक महत्वपूर्ण पद पर हैं, उनकी नाक के नीचे CMHO सालों से करोड़ों का भ्रष्टाचार का आरोप है और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी यह हास्यास्पद है! या तो वह प्रशासनिक रूप से पूरी तरह विफल हैं, या फिर इस ‘स्वास्थ्य घोटाले’ की जानकारी उन्हें पहले से थी। यह ‘डबल इंजन’ की सरकार नहीं, बल्कि ‘डबल भ्रष्टाचार’ का उदाहरण है।

BJP विधायक सहित विपक्ष ने इस मामले में न केवल CMHO डॉ. संजीव शुक्ला की तत्काल बर्खास्तगी की माँग की है, बल्कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों की समयबद्ध, न्यायिक या EOW जाँच की मांग भी दोहराई है।
तत्काल बर्खास्तगी: CMHO डॉ. संजीव शुक्ला को तुरंत पद से हटाया जाए ताकि जाँच प्रभावित न हो सके।
दोषियों पर FIR: भर्ती, खरीदी और पंजीयन में शामिल सभी अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षकों के खिलाफ FIR दर्ज हो।
फंड की रिकवरी: सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई (रिकवरी) तुरंत संबंधित अधिकारियों से की जाए।

डिप्टी सीएम दें जवाब: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि उनके कार्यकाल में यह भ्रष्टाचार कैसे फला-फूला।
विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले में जल्द और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मुद्दा सड़क से सदन तक उठाया जाएगा और रीवा में बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

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