Rewa news: रीवा में पीएम आवास के नाम पर हुई लाखों की ठगी पीएम आवास योजना बनी ठगी का जरिया ठगी कर अशोक पांडेय गायब
Rewa news: रीवा में प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी एक महत्वपूर्ण सरकारी स्कीम गरीबों के लिए उम्मीद की किरण थी, लेकिन शातिर ठगों ने इसे ही अपनी काली कमाई का जरिया बना लिया। यह कहानी है गरीबों के टूटे सपनों की, जिनसे घर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी की गई। इस पूरे मामला 2018 का है, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं और आरोपी बेखौफ घूम रहे हैं।
ऐसे रचा गया था ठगी का जाल
इस महाठगी के दो मुख्य मास्टरमाइंड : अशोक पांडेय, पिता स्वर्गीय शीतला प्रसाद पांडेय, निवासी ग्राम गौरी, तहसील हनुमना, और उनका एक शातिर साथी जो कथित तौर पर एक सरकारी कर्मचारी है। इन दोनों ने मिलकर रीवा के शहरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को निशाना बनाया, जो सालों से अपने घर का सपना देख रहे थे।
आरोपियों ने लोगों को विश्वास दिलाया कि वे सरकारी विभागों में अपनी पहचान का इस्तेमाल करके उन्हें आसानी से आवास योजना का लाभ दिलवा सकते हैं। एक सरकारी कर्मचारी के इस खेल में शामिल होने की वजह से लोग आसानी से उनके झांसे में आ गए। उन्होंने पीएम आवास के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठना शुरू कर दिया।

एक लाख बीस हजार की ठगी: पैसे वापस मांगने पर आज कल
ठगी का शिकार हुए एक पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने उनसे घर दिलाने के नाम पर 1 लाख 20 हजार रुपये हड़प लिए थे। यह रकम उनके लिए गाढ़ी कमाई थी, जिसे उन्होंने बेहतर जीवन की उम्मीद में दिया था। जब सालों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे।
इसके बाद शुरू हुआ टाल-मटोल का खेल। आरोपियों ने पैसे लौटाने के लिए ‘आज-कल’ करते हुए कई साल गुजार दिए।
पुलिस की निष्क्रियता:
पीड़ितों ने पहली शिकायत समान थाने में दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। एफआईआर तक दर्ज नही की थी , न तो आरोपियों को पकड़ने के लिए कोई बड़ी कार्रवाई की गई और न ही पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलवाई गई। इस दौरान, थाने का क्षेत्र भी बदल गया और अब यह अमहिया थाना क्षेत्र में आता है।
समान पुलिस की इस सुस्त कार्रवाई ने न सिर्फ पीड़ितों की न्याय की उम्मीद खत्म कर दी है, बल्कि ठगों को भी यह संदेश दिया है कि वे आसानी से बच सकते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी अशोक पांडेय अब सतना में किसी फैक्ट्री में काम कर रहा है और सामान्य जीवन जी रहा है। एक तरफ ठगी का शिकार हुए लोग अपनी खून-पसीने की कमाई के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनका पैसा हड़पने वाला व्यक्ति बेखौफ अपनी जिंदगी जी रहा है।
यह मामला रीवा में सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी का एक भयावह उदाहरण है, जो सरकारी तंत्र की कमजोरी और कानून व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या इन पीड़ितों को कभी न्याय मिल पाएगा? यह सवाल अब भी बरकरार है।
