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क्राइम

धोखाधड़ी के ‘चक्रव्यूह’ में फंसे बैंककर्मी: जेल ही अब ठिकाना, हाईकोर्ट ने भी नहीं दी राहत

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शिवपुरी। कहते हैं कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और जब बात जनता की गाढ़ी कमाई और कंपनी के विश्वास के साथ गद्दारी की हो, तो न्यायालय का रुख और भी सख्त हो जाता है। शिवपुरी के SV क्रेडिट लाइन लिमिटेड में लाखों रुपए के गबन के आरोपियों के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। न्यायालय के चक्कर काटने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिली है; बल्कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है—या तो पैसे चुकाओ, या जेल की सलाखों के पीछे ही रहो।

मामला शिवपुरी की कोतवाली थाना क्षेत्र का है। गुरुग्राम स्थित SV क्रेडिट लाइन लिमिटेड, जो लघु और दीर्घकालिक ऋण प्रदान करने का कार्य करती है, उसकी स्थानीय शाखा में तैनात शाखा प्रबंधक दीपक यादव और फील्ड ऑफिसर नरेश गोस्वामी ने अपनी मर्यादाओं को ताक पर रखकर कंपनी और ऋण धारकों के साथ बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

जुलाई 2024 से फरवरी 2025 के बीच, इन दोनों ने मिलकर कंपनी के नाम पर ऋण धारकों से किस्तों की वसूली तो की, लेकिन उसे बैंक के खाते में जमा करने के बजाय अपनी जेब के हवाले कर दिया। कंपनी की आंतरिक जांच (ऑडिट) में जब 7,93,790 रुपए का अंतर पाया गया, तब इस सुनियोजित ठगी का पर्दाफाश हुआ।

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कंपनी के डिविजनल मैनेजर विजय सिंह राजपूत की शिकायत पर सिटी कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने न केवल कंपनी के साथ वित्तीय धोखाधड़ी की, बल्कि उन मासूम ऋण धारकों के भरोसे को भी तोड़ा जो ईमानदारी से अपनी किस्तें चुका रहे थे।

निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपियों ने बड़ी उम्मीद के साथ माननीय उच्च न्यायालय, खंडपीठ ग्वालियर का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन वहां भी उन्हें करारा झटका लगा।

हाईकोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि यदि वे राहत चाहते हैं, तो उन्हें गबन की गई पूरी राशि जमा करनी होगी।

न्यायालय ने आरोपियों को मात्र 7 दिन का समय दिया है। यदि एक सप्ताह के भीतर गबन की गई राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनकी जमानत पर आगे कोई सुनवाई नहीं की जाएगी।

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