खेल

Criket news:जब धोनी की चतुराई ने तोड़ा ऑस्ट्रेलियाई ‘अजेय’ होने का गुमान: एक ऐतिहासिक जीत की दास्तां

Share With Others

 Criket news: India क्रिकेट के इतिहास में कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं जो समय की धूल में दबने के बजाय और भी चमकदार होते जाते हैं। साल 2007 का वह दौर याद कीजिए, जब विश्व क्रिकेट पर ऑस्ट्रेलियाई टीम का एकछत्र राज था। रिकी पोंटिंग की कप्तानी वाली वह टीम सिर्फ मैच नहीं जीतती थी, बल्कि विपक्षी टीम के मनोबल को कुचलने का माद्दा रखती थी। लेकिन चंडीगढ़ के मैदान पर महेंद्र सिंह धोनी नामक एक युवा कप्तान ने अपनी सूझबूझ और शांत चित्त से जो पटकथा लिखी, उसने न केवल पोंटिंग के घमंड को मिट्टी में मिला दिया, बल्कि भविष्य के ‘कैप्टन कूल’ के उदय की घोषणा भी कर दी।

Criket news: पोंटिंग की चुनौती और धोनी का मौन संकल्प
इस सीरीज की शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलियाई खेमे में अहंकार साफ दिखाई दे रहा था। रिकी पोंटिंग ने युवा धोनी पर तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया था कि ऐसे कप्तान तो ऑस्ट्रेलिया की हर गली और नुक्कड़ पर मिल जाते हैं। उस वक्त धोनी ने पलटवार करने के बजाय अपने बल्ले और दिमाग को जवाब देने के लिए तैयार किया। यह धोनी की बतौर कप्तान पहली वनडे सीरीज थी और उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन पाने के लिए पूरा आसमान बाकी था।

Criket news: मोहाली की वो तपती दोपहर और भारतीय बल्लेबाजी

धोनी ने टॉस जीता और बिना झिझक पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। मैदान पर उतरी भारत की सबसे भरोसेमंद जोड़ी—सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली। ऑस्ट्रेलिया की ओर से ब्रेटली अपनी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आग उगल रहे थे। सचिन को शुरुआत में संघर्ष करना पड़ा और उन्हें अंपायरों से कुछ जीवनदान भी मिले, लेकिन दूसरी ओर सौरव गांगुली आज पुराने ‘दादा’ वाले अंदाज में थे। उन्होंने ब्रेटली और मिचेल जॉनसन को कदमों का इस्तेमाल कर कवर ड्राइव और फ्लिक पर जो चौके जड़े, उसने भारतीय खेमे में जोश भर दिया।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

गांगुली के 41 रनों के बाद युवराज सिंह ने मोर्चा संभाला। जब ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर ब्रैड हॉग ने युवराज को उकसाने की कोशिश की और अपशब्द कहे, तो युवी ने अपनी बल्लेबाजी से उसका जवाब दिया। युवराज ने हॉग के एक ही ओवर में लगातार बाउंड्री लगाकर उनकी बोलती बंद कर दी। उधर सचिन तेंदुलकर ने भी अपनी लय हासिल कर ली थी और उन्होंने एक जुझारू अर्धशतक जड़ते हुए भारत को मजबूत स्थिति में पहुँचाया।

Criket news: उथप्पा का साहस और धोनी का ‘हेलीकॉप्टर’ अवतार

मैच का सबसे रोमांचक मोड़ तब आया जब क्रीज पर रॉबिन उथप्पा और एमएस धोनी मौजूद थे। उथप्पा ने उस दिन ब्रेटली जैसे दुनिया के सबसे खौफनाक गेंदबाज के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने ली की रफ़्तार वाली गेंदों पर आगे बढ़कर जिस तरह से सीधे शॉट खेले, उसने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के चेहरे पर शिकन ला दी।
लेकिन असली धमाका तो पारी की अंतिम गेंद पर होना बाकी था। धोनी ने जेम्स होप्स की गेंद पर अपना विश्वप्रसिद्ध ‘हेलीकॉप्टर शॉट’ खेला। गेंद बल्ले से लगते ही गोली की रफ़्तार से बाउंड्री के पार स्टैंड्स में जा गिरी। धोनी के इस छक्के और 35 गेंदों पर खेली गई आतिशी पारी ने भारत का स्कोर 291 रनों तक पहुँचा दिया। पोंटिंग के चेहरे की हवाईयाँ अब उड़ने लगी थीं।

रणनीति का खेल: धोनी की जादुई विकेटकीपिंग

292 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत बेहद खतरनाक थी। मैथ्यू हेडन और एडम गिलक्रिस्ट की जोड़ी ने भारतीय तेज गेंदबाजों की धुनाई शुरू कर दी। ऐसा लग रहा था कि ऑस्ट्रेलिया यह मैच 40 ओवरों में ही खत्म कर देगा। यहाँ से धोनी के दिमाग का जादू शुरू हुआ।

धोनी ने देखा कि गिलक्रिस्ट लगातार पुल शॉट खेल रहे हैं। उन्होंने फौरन आरपी सिंह को शॉर्ट गेंद फेंकने का इशारा किया और बाउंड्री पर फील्डर तैनात किया। गिलक्रिस्ट ठीक उसी जाल में फँसे और कैच दे बैठे। इसके बाद रिकी पोंटिंग क्रीज पर आए। पोंटिंग आज अपने पुराने तेवर में थे, लेकिन धोनी ने इरफान पठान की गेंद पर स्टंप के बिल्कुल पास आकर खड़े होने का साहस दिखाया। जैसे ही पोंटिंग ने पैर थोड़ा सा बाहर निकाला, धोनी ने पलक झपकते ही बेल्स उड़ा दीं। रिप्ले में पोंटिंग आउट पाए गए और यह मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

अंत का रोमांच और जहीर खान की नब्ज

मैच का अंतिम चरण किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। एंड्रयू साइमंड्स और मैथ्यू हेडन ने ऑस्ट्रेलिया को जीत के करीब पहुँचा दिया था। ऑस्ट्रेलिया को आखिरी 20 गेंदों पर सिर्फ 24 रन चाहिए थे और उनके 6 विकेट बाकी थे। पूरा स्टेडियम शांत हो गया था। लेकिन धोनी ने एक बार फिर दांव खेला। उन्होंने आरपी सिंह को गेंद थमाई, जिन्होंने साइमंड्स के डंडे उखाड़ दिए और अगली ही गेंद पर एक सटीक थ्रो से ब्रैड हॉज को रन आउट कर दिया। दो गेंदों में दो विकेटों ने मैच का पासा पलट दिया।

अंतिम ओवर में ऑस्ट्रेलिया को 16 रनों की दरकार थी। जहीर खान के हाथ में गेंद थी। पहली गेंद पर चौका खाने के बाद जहीर ने अपनी नसों पर काबू पाया और सटीक कटर गेंदे फेंकी। आखिरी गेंद पर जब 9 रनों की जरूरत थी, तब जहीर ने डॉट बॉल फेंकी और भारत ने 8 रनों से वह ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

धोनी को उनकी शानदार बल्लेबाजी, चतुर कप्तानी और बिजली जैसी विकेटकीपिंग के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया। यह जीत सिर्फ एक मैच का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह संदेश था कि भारतीय क्रिकेट अब डरने वाला नहीं है। पोंटिंग का घमंड टूट चुका था और दुनिया को एक ऐसा कप्तान मिल गया था जिसने आगे चलकर भारत को विश्व विजेता बनाया।
धोनी की उस दिन की कप्तानी ने साबित कर दिया कि क्रिकेट केवल ताकत से नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग और सही रणनीति से जीता जाता है। वह जीत आज भी करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ताज़ा है, क्योंकि उसी दिन ‘थाला’ ने ऑस्ट्रेलिया के अजेय होने के मिथक को तोड़ा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *