मध्य प्रदेश

Rewa news: सिरमौर के दुवारी में ‘भ्रष्टाचार’ की नींव पर खड़ा हो रहा पंचायत भवन; तंत्र की साठगांठ का खुला खेल

Share With Others

Rewa news: रीवा जिले के जनपद पंचायत सिरमौर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दुवारी इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में हो रहे खुले भ्रष्टाचार और जिम्मेदारों की हठधर्मिता को लेकर चर्चा में है। शासन द्वारा ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से स्वीकृत ‘पंचायत भवन’ आज कमीशनखोरी और घटिया निर्माण की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।

. मानकों की धज्जियां: “सीमेंट कम, रेत ज्यादा”स्थानीय निवासी और मुख्य शिकायतकर्ता रामबिहारी द्विवेदी ने मौके पर चल रहे निर्माण कार्य की पोल खोलते हुए बताया कि यहाँ तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। निर्माण में 10:1 के अनुपात (10 बोरी रेत पर मात्र 1 बोरी सीमेंट) का मसाला उपयोग किया जा रहा है।

विशेषज्ञों की मानें तो इस तरह का निर्माण केवल एक ‘ढांचा’ मात्र होता है, जिसकी उम्र और मजबूती शून्य के बराबर होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि भवन की नींव से लेकर दीवारों तक में पीली ईंटों और घटिया सामग्री का उपयोग कर सरकारी बजट को ठिकाने लगाया जा रहा है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

Latest Updates on Rewa News

सरपंच-सचिव का शर्मनाक तर्क: “ऊपर तक जाता है पैसा”
इस मामले का सबसे गंभीर पक्ष वह बयान है जो कथित तौर पर सरपंच और सचिव द्वारा दिया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि जब उन्होंने गुणवत्ता सुधारने की बात कही, तो उन्हें दो टूक जवाब मिला:

“हमें ऊपर के अधिकारियों को मोटी रकम बतौर कमीशन देनी पड़ती है। जब तक नीचे से पैसे नहीं बचाएंगे, तो ऊपर कैसे पहुँचाएंगे? हमें भी इस काम से पैसे कमाने हैं।”

यह बयान सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र में जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार और ‘कमीशन कल्चर’ की ओर इशारा करता है। यदि यह सच है, तो सवाल उठता है कि क्या वरिष्ठ अधिकारियों की मौन सहमति से ही जनता के खून-पसीने की कमाई लूटी जा रही है?

सूचना के अधिकार (RTI) पर पहरा

लोकतंत्र में पारदर्शिता के लिए बनाया गया ‘सूचना का अधिकार’ दुवारी पंचायत में दम तोड़ता नजर आ रहा है। रामबिहारी द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने निर्माण की लागत, सामग्री का विवरण और तकनीकी स्वीकृति की जानकारी मांगी थी, लेकिन हफ़्तों बीत जाने के बाद भी जानकारी नहीं दी गई। जानकारी छिपाना इस बात की पुष्टि करता है कि पर्दे के पीछे बड़ा खेल चल रहा है।

आक्रोशित ग्रामीण और आंदोलन की सुगबुगाहट

ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने गांव की संपत्ति को इस तरह बर्बाद होते नहीं देख सकते। प्रशासन की सुस्ती से नाराज होकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया गया है।
आगामी कदम: कलेक्टर घेराव: ग्रामीण जल्द ही रीवा मुख्यालय पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।
आमरण अनशन: यदि मौके पर जांच दल भेजकर काम नहीं रुकवाया गया और दोषियों को निलंबित नहीं किया गया, तो शिकायतकर्ता ने कलेक्टर कार्यालय के समक्ष आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *