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Rewa news: पुलिस की पटकथा पर भारी पड़े अधिवक्ता 1 क्विंटल गांजा तस्करी मामले में राहुल प्यासी समेत 5 बरी, राजीव सिंह (शेरा ) ने अपनी दलीलों से पुलिस की तफ्तीश के उड़ाए चिथड़े

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Rewa news: अधिवक्ता राजीव सिंह ‘शेरा’ की जिरह के आगे बौनी साबित हुई पुलिसिया तफ्तीश NDPS कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
रीवा। कानून के दांव-पेंच और मजबूत दलीलों के सामने रीवा पुलिस की वह ‘फिल्मी कहानी’ ताश के पत्तों की तरह बिखर गई, जिसे 8 साल पहले 1 क्विंटल गांजे की बरामदगी के साथ बुना गया था। विशेष NDPS न्यायालय ने बहुचर्चित गांजा तस्करी मामले में मुख्य आरोपी राहुल प्यासी (राहुल मिश्रा) समेत सभी पांचों आरोपियों को ससम्मान बरी करने का आदेश जारी किया है।

अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगे आरोपों को ‘संदेह से परे’ साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।

कानून की कसौटी पर फेल हुई ‘खाकी’

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बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार (शेरा) ने अपनी पैनी दलीलों से पुलिस की चार्जशीट के चिथड़े उड़ा दिए। उन्होंने कोर्ट में साबित किया कि पुलिस की कार्रवाई न्यायसंगत नहीं, बल्कि ‘बनावटी’ गढ़ी गई है।

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3 मुख्य बिंदु, जिनसे पलटा पूरा मामला

अवैध हिरासत का पर्दाफाश: अधिवक्ता शेरा सिंह ने दस्तावेजी प्रमाणों के साथ साबित किया कि राहुल प्यासी को 3 अगस्त 2018 की सुबह 9 बजे ही हिरासत में ले लिया गया था, जबकि पुलिस ने गिरफ्तारी रात 11 बजे दिखाई। गिरफ्तारी से पहले ही कोर्ट में ‘अवैध हिरासत’ का आवेदन पेश होना पुलिस की थ्योरी के लिए घातक साबित हुआ।

कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन: NDPS एक्ट की धारा 42 और 50 तलाशी और जब्ती के नियम का पालन न करना पुलिस की सबसे बड़ी चूक बनी। कोर्ट ने माना कि जब बुनियादी नियमों की अनदेखी की गई, तो पूरी कार्रवाई ही शून्य हो जाती है।

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अभियोजन ने 12 गवाह पेश किए, लेकिन क्रॉस के दौरान स्वतंत्र गवाहों ने पुलिस की कहानी का समर्थन करने से इनकार कर दिया। गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास ने पुलिस की विश्वसनीयता को शून्य कर दिया।

अधिवक्ता शेरा सिंह ने बताया कि समान थाना पुलिस के मुताबिक, 3 अगस्त 2018 को तत्कालीन थाना प्रभारी प्रभात शुक्ला को मुखबिर से सूचना मिली थी कि संजय नगर स्थित बालाजी मैरिज गार्डन के पास मारुति SX4 और टाटा सफारी में गांजे की खेप है। पुलिस ने 110 किलो गांजा बरामद करने का दावा करते हुए 5 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा था।

बरी हुए आरोपियों के नाम

1-  राहुल मिश्रा उर्फ संजीव मिश्रा (राहुल प्यासी)
2- अभिनव उर्फ गोलू
3- नीरज विश्वकर्मा
4- शशि भूषण शुक्ला
5- परशुराम शुक्ला

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पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रहार

यह फैसला रीवा पुलिस की कार्यशैली पर किसी तमाचे से कम नहीं है। 110 किलो गांजा बरामद होने के बावजूद, पुलिस की कमजोर पैरवी और ‘प्रोटोकॉल’ के उल्लंघन ने इतने गंभीर मामले को कमजोर कर दिया। बचाव पक्ष ने इसे एक ‘सुनियोजित षड्यंत्र’ करार दिया, जिसे माननीय न्यायालय ने भी साक्ष्यों के अभाव में स्वीकार किया। इस हाई-प्रोफाइल केस में राजीव सिंह परिहार (शेरा) के साथ एडवोकेट अनिल, गिरीश पटेल, रामदल रावत, साक्षी सिंह बघेल, साक्षी सिंह परिहार, संभव मिश्रा, सुरेश विश्वकर्मा और तृषा कुशवाहा की टीम ने डिफेंस की दीवार को अभेद्य बनाया।

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