Rewa news: रीवा और मऊगंज में ‘शराब माफिया’ का बोलबाला! ठेकेदार ग्राहकों का खून चूस रहे हैं; शहर से लेकर गाव तक पैकारी आबकारी विभाग ‘धृतराष्ट्र’ की तरह आँखें मूंदे बैठा है।
Rewa news: शहरों से लेकर गाँवों तक अवैध शराब के सिंडिकेट; प्रति बोतल 50 से 150 रुपये तक की खुलेआम लूट हो रही है, जबकि प्रशासन खामोश है।
विंध्य क्षेत्र के दो प्रमुख जिले, रीवा और नवगठित मऊगंज, इस समय अवैध शराब की लूट और खुलेआम अधिक दामों की गिरफ्त में हैं। शराब ठेकेदारों ने कानून और नियमों की अवहेलना कर एक समानांतर ‘शराब मंडी’ बना ली है जहाँ ग्राहकों का खुलेआम शोषण हो रहा है।
खुलेआम लूट: ₹150 की अधिक कीमत
शराब ठेकेदारों के कर्मचारी ग्राहकों को खुलेआम चूना लगा रहे हैं। मानक मूल्य (एमआरपी) पर शराब बेचने के बजाय, वे प्रति बोतल ₹50 से ₹150 अतिरिक्त वसूल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यह लूट सिर्फ़ छिटपुट दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि रीवा और मऊगंज के लगभग सभी शराब ठेकों पर एक संगठित गिरोह काम करता है। ग्राहकों को ज़्यादा दाम चुकाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे उनकी गाढ़ी कमाई ठेकेदारों की तिजोरियों में जा रही है।
अवैध वसूली: प्रशासनिक लापरवाही
अधिक दामों के साथ-साथ अवैध वसूली भी बड़े पैमाने पर हो रही है। लाइसेंसी दुकानों से शराब की पेटियाँ उठाकर गाँवों और मोहल्लों में अवैध रूप से बेची जा रही हैं। यह अवैध कारोबार सरकारी राजस्व को चूना लगा रहा है, साथ ही समाज के हर वर्ग, यहाँ तक कि किशोरों तक भी नशीले पदार्थों की पहुँच आसान बना रहा है।
आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल: ‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका में
सबसे बड़ा सवाल ज़िले के आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर उठता है। यह अवैध कारोबार और अधिक दामों की वसूली खुलेआम, दिनदहाड़े हो रही है, लेकिन कोई भी विभाग इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आबकारी विभाग ने जानबूझकर आँखें मूंद ली हैं और महाभारत के पात्र “धृतराष्ट्र” की भूमिका निभा रहा है, जो अपने शासन में घोर अन्याय को देखते हुए भी मौन रहता है। यह निष्क्रियता घोर मिलीभगत या कर्तव्य की घोर उपेक्षा की ओर इशारा करती है।
स्थानीय प्रशासन से तत्काल और सख्त कार्रवाई की माँग की गई है। नागरिकों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से इस गिरोह को ध्वस्त करने की अपील की है। विभाग से माँग की गई है कि वह अधिक शुल्क वसूलने वाले ठेकेदारों के लाइसेंस रद्द करे और उन पर भारी जुर्माना लगाए। अवैध वसूली को संरक्षण देने वाले आबकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाए।
