रीवा संभाग

Rewa news: रीवा में ‘आबकारी सिंडिकेट’ की खुली डकैती; क्या ‘सूर्यवंशी’ का तेज रोक पाएगा ठेकेदारों की मनमानी

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Rewa news: रीवा नई आबकारी नीति या लूट की खुली छूट? ठेकेदारों की ‘ओवररेटिंग’ वाली मनमानी पर कब गिरेगी गाज क्या नवागत कलेक्टर अब रीवा में लेंगे एक्शन

रीवा विंध्य की धरा पर शराब के ठेकों का नया दौर शुरू होते ही “लूट का खेल भी पूरे शबाब पर है। आबकारी विभाग के नियमों को ताक पर रखकर शराब ठेकेदारों ने अपना ‘समानांतर प्रशासन’ चलाना शुरू कर दिया है। जैसे ही नए टेंडर हुए, शराब की बोतलों पर प्रिंट रेट (MRP) महज एक दिखावा बनकर रह गया है। क्या आबकारी विभाग ने इन्ही लूट की खुली छूट दे दी है अगर नही तो क्यो नही हो रही कार्यवाई।

‘लूट’ का गणित: 80 से ₹120 की अवैध वसूली

जिले की लगभग हर शराब दुकान पर एक ही मंजर है—काउंटर पर पहुँचते ही शराब के शौकीनों को एमआरपी से 80 रुपये से लेकर 120 रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।
सवाल यह है जब सरकार ने दरें तय कर दी हैं, तो यह “एक्स्ट्रा टैक्स” किसकी जेब में जा रहा है?

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ठेकेदारों का तर्क है कि उन्होंने ऊंचे दामों पर टेंडर लिए हैं, इसलिए वसूली तो जनता से ही होगी। लेकिन क्या कानून इसकी इजाजत देता है?

नवागत कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी से उम्मीदें क्या जनता को मिलेगा न्याय

रीवा के नए कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी का कल देर शाम रीवा पदभार संभालते ही अपनी कार्यशैली से कड़े संकेत दिए हैं। अब जिले की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे शराब सिंडिकेट के इस संगठित लूट तंत्र को ध्वस्त कर पाएंगे

बड़ा सवाल क्या आबकारी विभाग के अधिकारी इस खेल से अनजान हैं? या फिर “ऊपर तक पहुँचने वाले हिस्से” ने उनकी आँखों पर पट्टी बाँध रखी है MRP का उल्लंघन शराब की हर बोतल पर ₹80-₹120 की अवैध वसूली

शिकायतों व खबरों के बावजूद आबकारी अमले की रहस्यमयी खामोशी

रीवा के जनता की मांग हर दुकान पर रेट लिस्ट चस्पा हो शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन नियम विरुद्ध वसूली करना प्रशासन के स्वास्थ्य के लिए भी ठीक नहीं है। यदि समय रहते इन बेखौफ ठेकेदारों पर नकेल नहीं कसी गई, तो यह न केवल सरकार की छवि धूमिल करेगा बल्कि रीवा में भ्रष्टाचार के एक नए युग की शुरुआत होगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि कलेक्टर सूर्यवंशी का ‘हंटर’ इन ठेकेदारों पर कब चलता है या फिर यह लूट का खेल बदस्तूर जारी रहेगा।

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