रीवा में रोजगार सहायकों का फूटा गुस्सा: ‘अवैध’ बीएलओ ड्यूटी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी
रीवा जिले में कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) पर निर्वाचन आयोग के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए उन्हें अवैध रूप से बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) की ड्यूटी पर लगाने और प्रतिदिन एसडीएम कार्यालय बुलाकर उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप लगाया है।
ग्राम रोजगार सहायकों ने इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक तीन-सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे कलमबंद हड़ताल पर जाने और माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने को विवश होंगे।
रोजगार सहायकों का कहना है कि वे अंशकालिक संविदा कर्मचारी हैं, जैसा कि राज्य रोजगार गारंटी परिषद के पत्र क्र. 5126 (दिनांक 12.05.2013) से स्पष्ट है। नियमतः उन्हें निर्वाचन कार्य से मुक्त रखा जाना चाहिए। बावजूद इसके, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी उन्हें नौकरी समाप्त करने की धमकी देकर जबरन बीएलओ ड्यूटी करवा रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश की अवहेलना: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश के स्पष्ट दिशा-निर्देश (पत्र क्र. 39/3/2022/बीएलओ/3322, दिनांक 10.06.2025) में कहा गया है कि बीएलओ की नियुक्ति में केवल नियमित कर्मचारियों को ही शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, दिनांक 07.08.2025 की बैठक में स्पष्ट मनाही की गई थी कि ग्राम रोजगार सहायकों को बीएलओ न बनाया जाए।
: निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा रोज़गार सहायकों को निर्वाचन कार्य के बहाने प्रतिदिन एसडीएम कार्यालय बुलाया जा रहा है, जिससे उनके मूल कार्य (मनरेगा आदि) बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
तत्काल प्रभाव से समस्त ग्राम रोजगार सहायकों को बीएलओ ड्यूटी से मुक्त किया जाए।
निर्वाचन आयोग के निर्देशों का उल्लंघन कर रहे निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के विरुद्ध सख्त विभागीय कार्यवाही की जाए।
ज्ञापन सौंपने वालों में जनपद पंचायत रीवा के समस्त रोजगार सहायक और उनके प्रतिनिधि संगठन शामिल थे।
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