Abhay mishra : संकट में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की कुर्सी: हाईकोर्ट ने ठुकराई याचिका रद्द करने की मांग
Abhay mishra: मध्यप्रदेश रीवा जले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मात्र 637 वोटों के बेहद कम अंतर से मिली जीत अब कानूनी दांवपेच में फंसती नजर आ रही है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अभय मिश्रा की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दायर चुनाव याचिका को शुरुआती स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की थी।
जस्टिस विनय सराफ की एकल पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि याचिका में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और इनकी विस्तृत सुनवाई (ट्रायल) जरूरी है।
आरोपों के घेरे में ‘माननीय’: क्या छिपाई गई आपराधिक जानकारी
भाजपा प्रत्याशी के.पी. त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका में विधायक अभय मिश्रा पर नामांकन के दौरान शपथ पत्र (फॉर्म-26) में महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं ।
9 आपराधिक मामले: याचिकाकर्ता का दावा है कि अभय मिश्रा ने हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड के कॉलम में “Not Applicable” लिखा, जबकि RTI से मिले दस्तावेजों के अनुसार उनके विरुद्ध 9 मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।
कर्ज का हिसाब गायब: आरोप है कि ICICI बैंक से लिए गए लगभग 23 लाख रुपये के लोन (जिसकी देनदारी अब 50 लाख से ऊपर है) का उल्लेख हलफनामे में नहीं किया गया।
आय के रहस्यमयी स्रोत: शपथ पत्र में निजी कंपनी से वेतन मिलने की बात तो कही गई, लेकिन कंपनी का नाम और विवरण गुप्त रखा गया।
Abhay mishra: सरकारी अनुबंध का विवाद
Challenges Faced by Abhay Mishra
याचिका में यह भी मुद्दा उठाया गया है कि चुनाव के समय अभय मिश्रा का कुछ सरकारी विभागों के साथ अनुबंध था, जो जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अयोग्यता का आधार बन सकता है।
हाईकोर्ट की दो टूक: “भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आ सकता है मामला”
कोर्ट ने अभय मिश्रा की तकनीकी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कहा कि यदि हलफनामे में जानकारी छिपाने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह ‘भ्रष्ट आचरण’ (Corrupt Practice) की श्रेणी में आएगा।
अदालत का आदेश: “याचिका प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य है। इसे तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।”
हाईकोर्ट ने अब विधायक को 4 सप्ताह के भीतर विस्तृत लिखित जवाब पेश करने का अंतिम अवसर दिया है।
Abhay mishra:क्या जा सकती है विधायकी
सेमरिया का यह मामला अब ट्रायल के चरण में प्रवेश कर चुका है। यदि ट्रायल के दौरान साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होते हैं, तो चुनाव शून्य घोषित किया जा सकता है। 637 वोटों की मामूली बढ़त लेकर विधानसभा पहुंचे अभय मिश्रा के लिए आने वाले दिन राजनीतिक और कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
