रीवा संभागमध्य प्रदेश

Bjp news: सियासत का ‘बदरंग’ चेहरा: बजरंग बली के झंडे का प्रतीक या सिर्फ पोंछने का जरिया मंनगवा विधायक नरेंद्र प्रजापति के चेहरे में लगे केक के पोछने की फोटो वायरल

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Bjp news: मर्यादा पुरुषोत्तम का नाम… और मर्यादाओं का ही चीरहरण। राजनीति में जब सत्ता का अहंकार सिर चढ़कर बोलता है, तो अक्सर विवेक पीछे छूट जाता है। हाल ही में वायरल हुई एक तस्वीर ने न केवल एक विधायक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन तमाम दावों की पोल खोल दी है जो धर्म और संस्कृति की रक्षा के नाम पर किए जाते हैं।

तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि जिस भगवा बस्त्र या झंडे पर ‘श्री राम’ का पवित्र नाम अंकित है—जिसे हिंदू समाज श्रद्धा का सर्वोच्च केंद्र मानता है—उसे भाजपा पार्टी के मंनगवा विधायक नरेंद्र प्रजापति की एक फोटो को फेश बुक में प्रकाश तिवारी एकाउंट से वायरल हुई है जिसमे विधायक द्वारा चेहरे पर लगी गंदगी और केक साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह दृश्य देख किसी भी राम भक्त का मन आहत होना स्वाभाविक है।

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क्या भाजपा के इन माननीय के लिए राम नाम केवल चुनावी वैतरणी पार करने का एक माध्यम भर है ।

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दोहरा मापदंड क्यो अगर यही कृत्य किसी आम आदमी या विपक्षी दल के नेता से हुआ होता, तो क्या अब तक “सनातन खतरे में है” का शोर नहीं मच गया होता?

सत्ता का मद: क्या विधायक जी को यह होश नहीं रहा कि उनके हाथ में क्या है? या फिर सत्ता की हनक में उन्होंने पवित्र प्रतीकों को ‘डिस्पोजेबल’ समझ लिया है
दिखावे की भक्ति: मंचों से जय श्री राम का उद्घोष करना और एकांत में उसी नाम से अपनी गंदगी साफ करना, क्या यह हिंदुत्व का प्रमाण नहीं है?

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जनता की अदालत में जवाबदेही

जनता सब देख रही है। जिस पटके को कार्यकर्ता और आम नागरिक अपने गले का हार और माथे का तिलक समझते हैं, उसका ऐसा तिरस्कार किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की लापरवाही नहीं है, बल्कि उस विचारधारा पर भी सवाल है जो खुद को संस्कृति का ठेकेदार बताती है।

“मुंह की गंदगी तो साफ हो गई, लेकिन करोड़ों राम भक्तों के दिल पर जो चोट लगी है, उसका हिसाब कौन देगा? भक्ति दिखावे की नहीं, भाव की वस्तु है। पर यहाँ तो भाव ही गायब है।”
सत्ता में बैठे लोगों को यह समझना होगा कि ‘राम’ वोट बैंक नहीं, विश्वास हैं। और विश्वास के साथ किया गया ऐसा खिलवाड़ अक्सर राजनीतिक पतन की शुरुआत होता है।

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