Rewa deshi jugad: विंध्य का जायका: रीवा की तपती धूप में निखरता है ‘टिकोरी’ के अचार का सोंधापन
Rewa deshi jugad:रीवा सफेद बाघों की धरा और अपनी सांस्कृतिक संपन्नता के लिए विख्यात विंध्य क्षेत्र में गर्मियों का आगमन सिर्फ तपिश ही नहीं, बल्कि आम की’टिकोरी’ के अचार की सोंधी महक भी लेकर आता है। रीवा सहित पूरे विंध्य अंचल में इन दिनों घरों के आँगन और छतों पर कांच की बरनियाँ धूप सेंकती नजर आ रही हैं। यह कोई साधारण अचार नहीं, बल्कि 10 दिनों की कड़ी मेहनत और प्रकृति के तालमेल से तैयार होने वाला ‘विंध्य का स्वाद’ है।
परंपरा और स्वाद का संगम : Rewa deshi jugad:
रीवा के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे कच्चे आमों, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘टिकोरी’ कहा जाता है, का अचार बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। जैसे ही बागों में टिकोरी लगने लगती है, स्थानीय बाजारों में मसालों की मांग बढ़ जाती है। मान्यता है कि जो स्वाद विंध्य की टिकोरी में है, वह हाइब्रिड या बड़े आमों में नहीं मिलता।
10 दिनों का कड़ा अनुशासन :Rewa deshi jugad:
अचार तैयार करने की प्रक्रिया किसी साधना से कम नहीं है। स्थानीय जानकार बताते हैं कि टिकोरी के अचार का असली राज इसकी ‘धूप’ में छिपा है।
नमी से बचाव: पहले आमों को धोकर पूरी तरह सुखाया जाता है।
मसालों का सन्तुलन: पीली सरसों, मेथी, सौंफ, कलौंजी और अजवाइन को हल्का भूनकर दरदरा पीसा जाता है।
धूप में पकना: मसाले भरने के बाद इसे करीब 7 से 10 दिनों तक कड़क धूप में रखा जाता है। यही वह समय है जब सूर्य की किरणें मसालों और आम के गूदे को एक-दूसरे में समाहित कर देती हैं।
रीवा का यह पारंपरिक अचार न केवल भूख बढ़ाता है बल्कि पाचन के लिहाज से भी गुणकारी माना जाता है। शुद्ध सरसों तेल और हींग के मेल से तैयार यह टिकोरी का अचार साल भर खराब नहीं होता। यहाँ के लोगों का मानना है कि चाहे कितनी भी महंगी डिश सामने हो, लेकिन टिकोरी के अचार के साथ अरहर की दाल और चावल का जो आनंद है, वह अतुलनीय है।
विंध्य की पहचान बनता ‘देसी अचार’ :Rewa deshi jugad:
आज के दौर में जब बाजार डिब्बाबंद उत्पादों से भरा है, रीवा की महिलाएं आज भी अपनी इस विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। यह अचार अब केवल घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि विंध्य से बाहर रहने वाले लोग भी गर्मियों में रीवा से टिकोरी के अचार की फरमाइश जरूर करते हैं।
आम का अचार महज एक व्यंजन नहीं, बल्कि विंध्य की जीवनशैली का हिस्सा है। यह हमें सिखाता है कि कुछ बेहतरीन चीजों को पाने के लिए वक्त और धैर्य की जरूरत होती है, ठीक वैसे ही जैसे 10 दिन धूप में तपने के बाद यह अचार ‘अमृत’ समान हो जाता है।
